जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 13 साल बाद फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए एनआईए द्वारा गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी दोषियों के लिए सजा का एलान भी कर दिया है। लंबे समय से इस निर्णय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवारों के लिए इसे एक बेहद महत्वपूर्ण न्याय माना जा रहा है।
विशेष अदालत का बड़ा फैसला
अंतिम बहस में शामिल होने के लिए सेंट्रल जेल जगदलपुर से 10 बंदियों को अदालत में लाया गया था। मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट ने बचे हुए सभी 10 आरोपियों को कसूरवार पाया है। इससे पहले, अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख दो बार बदली गई थी। पहले निर्णय के लिए 31 अगस्त की तिथि तय की गई थी, जिसके बाद इसे बढ़ाकर 5 सितंबर का दिन तय किया गया।
परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला
यह दर्दनाक घटना 25 मई, 2013 को घटी थी, जब प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की परिवर्तन यात्रा सुकमा से वापस लौट रही थी। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से इस पूरे काफिले को निशाना बनाया था। माओवादियों के इस भीषण हमले में कुल 32 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। माओवादियों की इस हिंसक कार्रवाई ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
कई वरिष्ठ नेताओं की हुई थी हत्या
झीरम घाटी में हुए इस घातक हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की जान चली गई थी। हमले में जान गंवाने वालों में प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब एनआईए की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देकर मामले का पटाक्षेप किया है।
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1. एनआईए ने पेश की थी 1000 पन्नों की चार्जशीट
- एनआईए ने वर्ष 2015 में कोर्ट में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी।
- चार्जशीट में 11 आरोपियों का उल्लेख किया गया था।
- इनमें से 10 आरोपी जगदलपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
2. 101 गवाहों के दर्ज हुए बयान
- अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
- बचाव पक्ष की ओर से एक भी गवाह पेश नहीं किया जा सका।
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