छत्तीसगढ़ बस्तर के 184 धावकों ने हैदराबाद मैराथन में दिखाया दम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के 184 धावकों ने एनएमडीसी हैदराबाद मैराथन में अपनी प्रतिभा और दमखम का प्रदर्शन किया। कठिन चढ़ाई और ढलान वाले मार्ग पर 42.2 किलोमीटर की फुल मैराथन और 10 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लेने के बाद इन धावकों के लिए यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेलों में आगे बढ़ने की नई संभावनाओं और बड़े सपनों का माध्यम भी बना। मैराथन पूरी करने के बाद धावकों ने हैदराबाद के हयात प्लेस में एनएमडीसी के निदेशक (कार्मिक) कृष्ण कुमार ठाकुर की मौजूदगी में आज अपने अनुभव साझा किए।

प्रतिभागियों ने कठिन मार्ग, हजारों धावकों के साथ दौड़ने के अनुभव और भविष्य में एथलेटिक्स को गंभीरता से अपनाने की अपनी आकांक्षाओं के बारे में बताया। प्रतिभागियों के मुताबिक हैदराबाद मैराथन का मार्ग काफी चुनौतीपूर्ण था। कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई और ढलान ने महीनों से तैयारी कर रहे धावकों की सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली। मैराथन में कांस्टेबल फुलधर नेताम ने विशेष प्रदर्शन करते हुए 42.2 किलोमीटर की फुल मैराथन दो घंटे 45 मिनट 29 सेकंड में पूरी की।


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हालांकि फिनिशर्स के बीच उनके स्थान की पुष्टि हैदराबाद रनर्स सोसाइटी से होना बाकी है। किसान परिवार से आने वाले नेताम ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें एथलेटिक्स को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रेरित किया है। नेताम ने कहा, “मैं किसान परिवार से आता हूं और दौड़ ने मुझे एक अलग दिशा दी है। हैदराबाद में फुल मैराथन पूरी करने के बाद मेरा विश्वास बढ़ा है कि मैं एथलेटिक्स को गंभीरता से अपना सकता हूं। अब मैं ट्रैक एथलीट के रूप में प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ना चाहता हूं।

दंतेवाड़ा जिले के बचेली क्षेत्र के भांसी गांव निवासी संजय कुंजाम ने 10 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि गांव और आसपास की सड़कों पर अभ्यास करने के बाद हैदराबाद में हजारों लोगों के साथ दौड़ना बिल्कुल अलग अनुभव रहा। कठिन ढलानों के बावजूद दौड़ पूरी करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। बीजापुर जिले के बासागुड़ा गांव की अंजलि ने भी 10 किलोमीटर दौड़ पूरी की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर की मैराथन में हिस्सा लेने की उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।


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आयोजन के माहौल और रास्ते में मिले प्रोत्साहन ने उन्हें आगे भी दौड़ जारी रखने तथा अपने गांव के अन्य युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया है। मैराथन में शामिल अधिकांश प्रतिभागी बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, बस्तर और कोंडागांव सहित दूरस्थ क्षेत्रों से आए थे। लंबे समय तक नक्सल हिंसा और उससे जुड़ी चुनौतियों से प्रभावित रहे बस्तर में खेल गतिविधियों को युवाओं के लिए नए अवसर और वैकल्पिक भविष्य तैयार करने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

मैराथन के बाद धावकों को संबोधित करते हुए एनएमडीसी के निदेशक (कार्मिक) कृष्ण कुमार ठाकुर ने कहा कि बस्तर के युवाओं को हैदराबाद मैराथन में लाने का उद्देश्य केवल उन्हें दौड़ में शामिल कराना नहीं, बल्कि क्षेत्र में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।


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उन्होंने कहा कि एनएमडीसी की पूर्व की खेल गतिविधियों से भी बस्तर में प्रतिभाओं की पहचान करने में मदद मिली है। बस्तर में आयोजित कबड्डी लीग से कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आए हैं और अब इसी दिशा में वॉलीबॉल प्रतियोगिता आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। बस्तर के धावकों की भागीदारी क्षेत्र में खेलों को प्रोत्साहित करने और युवा प्रतिभाओं को बड़ा मंच उपलब्ध कराने की एनएमडीसी की पहल का हिस्सा थी।

एनएमडीसी हैदराबाद मैराथन के 15वें संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों धावकों ने फुल मैराथन, हाफ मैराथन और कम दूरी की विभिन्न दौड़ों में भाग लिया। बस्तर के इन धावकों के लिए हैदराबाद का अनुभव केवल फिनिशिंग टाइम तक सीमित नहीं रहा। बड़े शहरी मैराथन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा ने उनके सामने खेलों में आगे बढ़ने की नई संभावनाएं खोली हैं।