नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज के लिए वर्षों तक इंतजार करने वाली 15 वर्षीय तन्वी की मौत हो गई। राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी दो साल की उम्र से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। उसके माता-पिता ने वर्ष 2012 में एम्स में उसका इलाज शुरू कराया था, लेकिन परिवार के अनुसार करीब 14 साल तक इलाज और ऑपरेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मंगलवार, 1 सितंबर को दिल्ली में बच्ची ने दम तोड़ दिया।
तन्वी के पिता मुकेश परियानी के अनुसार, वह पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को लेकर एम्स की बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में पहुंचे थे। वहां प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें करीब एक वर्ष का समय लग गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। परियानी का आरोप है कि डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने का भरोसा दिया और इसके लिए आवश्यक राशि जमा कराने को कहा। इसके बाद अप्रैल 2014 में उन्होंने खून और पैसे जमा कराए। परिवार को ऑपरेशन के लिए 2 सितंबर 2015 की तारीख दी गई थी। हालांकि, निर्धारित तारीख पर अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें दिवाली के बाद आने के लिए कहा गया।
परियानी के मुताबिक, 16 दिसंबर 2015 को तन्वी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दांत में कीड़ा होने की बात कहकर ऑपरेशन टाल दिया गया। इसके बाद जनवरी 2016 में फिर बुलाया गया, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। परिवार के अनुसार, तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट, यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया, यानी फेफड़ों तक रक्त पहुंचने में गंभीर बाधा की समस्या थी। लंबे समय तक उपचार नहीं होने से उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
पिता का कहना है कि कई बार अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। उनके अनुसार, शिकायत के बाद उन्हें बुलाया गया, लेकिन शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और इसके बावजूद बेटी का ऑपरेशन नहीं हुआ। परियानी ने बताया कि वर्ष 2018 में डॉक्टरों ने उन्हें जानकारी दी कि उनकी बेटी के फेफड़े लगभग खराब हो चुके हैं। इसके बाद डॉक्टरों ने दिल और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की संभावना बताई।
परिवार के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान वे घर पर रहे। वर्ष 2023 में दोबारा एम्स पहुंचे और बच्ची की जांच कराई गई, लेकिन इसके बाद भी कोई ऑपरेशन नहीं हो सका। परियानी का दावा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन से चार बार शिकायत की। हर बार उन्हें बुलाया गया, लेकिन उनकी बेटी को अपेक्षित उपचार नहीं मिल सका।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में भी अस्पताल में केवल जांच कराई गई और उपचार आगे नहीं बढ़ा। अगस्त में तन्वी को एम्स में भर्ती कराया गया। उसकी विभिन्न जांचें की गईं, लेकिन परिवार के अनुसार कोई निर्णायक उपचार नहीं हो सका। आखिरकार 1 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने कहा कि यदि उनकी बेटी का ऑपरेशन वर्ष 2017 तक हो जाता तो संभवत: उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था और उपचार प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी बेटी ने करीब 15 साल तक बीमारी के साथ जीवन बिताया, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिल सका।परिवार ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और उपचार में हुई कथित देरी की जांच की मांग की है।

