6 सितंबर को सलधा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलेंगे सिंधी संत और समाजसेवक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित आसपास के जिलों के प्रमुख सिंधी संत और करीब 100 महिला-पुरुष समाजसेवक 6 सितंबर को बेमेतरा जिले के सलधा गांव पहुंचेंगे। यहां ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के चातुर्मास व्रत महोत्सव के दौरान विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करने, भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने और इस व्यापक अभियान में सिंधी समाज की प्रभावी भागीदारी को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक का आयोजन स्थानीय मसन्द सेवाश्रम के पीठाधीश और सिंधी समाज के संत साईं जलकुमार मसन्द साहिब द्वारा किया जा रहा है। साईं मसन्द साहिब को पूज्यपाद शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने प्रयागराज में आयोजित पिछले कुंभ मेले के दौरान 108 देशों के अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन परम धर्म संसद 1008 का संगठन मंत्री नियुक्त किया था। इसके अलावा मुंबई में आयोजित चातुर्मास व्रत महोत्सव के दौरान देशभर में चलाए जा रहे गौमाता राष्ट्रमाता अभियान के अंतर्गत उन्हें गौ संसद का सचेतक भी नियुक्त किया गया है।

साईं मसन्द साहिब पिछले 12 वर्षों से पूज्यपाद शंकराचार्यों और अन्य संतों के सहयोग से सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था की स्थापना तथा भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के अभियान से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि देश की स्वतंत्रता का मूल उद्देश्य भी भारत को अपनी सांस्कृतिक और वैदिक परंपराओं के आधार पर आगे बढ़ाना था। उन्होंने इस संदर्भ में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्वों बाल गंगाधर तिलक और महर्षि अरविंद सहित अन्य राष्ट्रनायकों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी के साथ जुड़े व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने और समाज की भूमिका पर चर्चा के लिए 6 सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।