12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने की तैयारियों की समीक्षा, अधिक मामलों के निपटारे पर जोर

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बिलासपुर। आगामी 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के संबंधित न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान कार्यपालक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू भी मौजूद रहे। बैठक में लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के समाधान को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अधिकारियों से कहा कि पुराने लंबित सिविल और आपराधिक सुलह योग्य मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए और राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उनका अधिकाधिक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, परक्राम्य लिखत अधिनियम से जुड़े मामलों और मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्री-लिटिगेशन मामलों में पक्षकारों को समझाइश देकर आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान कराने पर जोर दिया गया।

न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे पक्षकारों के साथ पहले से बैठक कर ऐसे मामलों की पहचान करें, जिनमें बीमा कंपनियां और वित्तीय संस्थाएं पक्षकार हैं। संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर समझौते की संभावनाओं को बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा मामलों का निपटारा कराने के प्रयास किए जाएं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार 12 सितंबर को उच्च न्यायालय, जिला एवं तहसील न्यायालयों के साथ पारिवारिक न्यायालय, फोरम, अधिकरण और राजस्व न्यायालयों में भी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। इसमें सिविल और आपराधिक सुलह योग्य मामलों समेत विभिन्न विवादों का आपसी सहमति से समाधान किया जाएगा। जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के लिए मोहल्ला लोक अदालत के माध्यम से भी समाधान की व्यवस्था रहेगी।

जिलों से मिली जानकारी के अनुसार अब तक कुल 28 लाख 35 हजार 773 मामलों की पहचान की जा चुकी है। इनमें 27 लाख 83 हजार 141 प्री-लिटिगेशन मामले और 52 हजार 832 न्यायालयों में लंबित मामले शामिल हैं। इन मामलों में पक्षकारों के बीच सुलह और समझौते की संभावनाओं को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक विवादों का शांतिपूर्ण एवं प्रभावी समाधान हो सके।