नेपाल त्रासदी: 1127 मौतें, 4800 से ज्यादा लापता, भारत की पांचवीं राहत खेप रवाना

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काठमांडू। नेपाल में लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। देश के मध्य, पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में तीन प्रमुख नदियों का जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर पहुंच गया है। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग की बाढ़ पूर्वानुमान शाखा के मुताबिक, बुधवार सुबह छह बजे तक सिंधुली जिले में सुन कोशी, गोरखा में बूढ़ी गंडकी और डडेलधुरा में महाकाली नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।

इससे पहले मंगलवार रात लामजुंग जिले में मार्स्यांगदी नदी ने खतरे का निशान पार कर लिया था। भुकुंडेबेसी जलस्तर निगरानी केंद्र पर रात 11:15 बजे नदी का पानी खतरे की सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। बाढ़ पूर्वानुमान शाखा की ताजा जानकारी के अनुसार, मार्स्यांगदी नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। नदी में पानी का बहाव बढ़ने के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ का जोखिम भी बना हुआ है।

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नेपाल में बाढ़ से तबाही का मंजर देखने पहुंचे सोनू सूद
बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद मंगलवार को नेपाल के बाढ़ प्रभावित त्रिशूली बाजार पहुंचे। उन्होंने मौके पर हालात का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं। बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखकर सोनू सूद ने चिंता जताई और कहा कि लोगों को सामान्य जिंदगी में लौटने में काफी समय लग सकता है।

एएनआई से बातचीत में उन्होंने नेपाल की मदद के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की। सोनू सूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में नेपाल को दी जा रही सहायता सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राहत और सहयोग का सिलसिला लगातार जारी रखना जरूरी है, क्योंकि प्रभावित लोगों की मुश्किलें कुछ हफ्तों या महीनों में खत्म नहीं होंगी। उन्होंने सभी से नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।

मौतों का आंकड़ा 1,127 पहुंचा
नेपाल में बाढ़ की तबाही से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। आपदा के एक सप्ताह बाद भी हजारों लोग लापता हैं और सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, सबसे ज्यादा शव चितवन से 348, नवलपरासी ईस्ट से 217, नवलपरासी वेस्ट से 190 और नुवाकोट से 155 बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहूं से 38 शव मिले हैं।

पुलिस ने बताया कि अब तक 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इनमें से 95 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता लोगों के परिवारों की मदद के लिए नेपाल पुलिस ने 911 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, ताकि परिजन तस्वीरों और उपलब्ध विवरण के आधार पर अपने रिश्तेदारों की पहचान कर सकें। नेपाल पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, 4,858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अभियान जारी है।

 

नेपाल के लिए भारत ने भेजी पांचवीं मदद
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने मदद का सिलसिला जारी रखा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को बताया कि भारत का पांचवां विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हो गया है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस विमान में 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम मौजूद है। टीम के साथ बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरण भी भेजे गए हैं।

इसके अलावा विमान में करीब 5.5 टन आवश्यक दवाएं भी भेजी गई हैं। भारत की ओर से यह सहायता नेपाल में जारी राहत एवं बचाव प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से भेजी गई है। विदेश मंत्री ने कहा कि पांचवां भारतीय विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है और इसमें विशेष उपकरणों से लैस बचाव दल के साथ बड़ी मात्रा में जरूरी दवाएं भी शामिल हैं।

सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना
लोक बहादुर छेत्री ने कहा कि इस समय नेपाल सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, लापता लोगों का पता लगाना, बचे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों, चाहे वे नेपाली नागरिक हों या विदेशी, को जरूरी सहायता और सहयोग मिले। नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत के साथ-साथ कई लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में राहत, शवों की पहचान और जोखिम वाले इलाकों में बचाव अभियान लगातार जारी है।

भारत और चीन की विशेष टीमें भी मदद में उतरीं
इस बीच नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और चीन की विशेष अंतरराष्ट्रीय टनल रेस्क्यू टीमें नेपाल पहुंचकर बचाव अभियान में शामिल हो गई हैं। ये टीमें खास तौर पर उन इलाकों में काम कर रही हैं जहां भूमिगत सुरंगों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालना बेहद जोखिम भरा है। इन टीमों को नेपाल सेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं पर तैनात किया गया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और जन कूटनीति विभाग के प्रमुख लोक बहादुर छेत्री ने काठमांडू में मंत्रालय की चौथी आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बाढ़ से प्रभावित महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर साइटों पर विशेष तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर भूमिगत और बेहद जोखिम भरे बचाव अभियानों के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

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सिर्फ 95 शव परिवारों को सौंपे गए
नेपाल में त्रासदी के बाद बरामद शवों में से अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण प्रशासन को वैज्ञानिक तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने एक दिन पहले फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया था कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों और अज्ञात शवों को कानून के अनुसार और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत संभाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन शवों का प्रबंधन कर रही है जिनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं है। ऐसे मामलों में डीएनए सैंपल और दूसरे जरूरी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर शव की पहचान की जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक, शवों के प्रबंधन में नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद ली जा रही है। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा रहा है।

लापता लोगों की तलाश में जुटे परिवारों की मदद को आगे आए युवा
नेपाल में पिछले सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे मुश्किल समय में बिदुर के कुछ युवा परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने ‘यूथ इनिशिएटिव’ के तहत एक छोटा सा संचार सहायता केंद्र बनाया है, जहां लापता परिजनों की जानकारी जुटाने आए लोगों को मोबाइल चार्ज करने और फोन से संपर्क करने की सुविधा दी जा रही है।

बाढ़ के दौरान कई लोगों के मोबाइल फोन खो गए हैं, जबकि कई लोगों के फोन की बैटरी खत्म हो चुकी है। ऐसे लोगों के लिए यह सहायता केंद्र काफी उपयोगी साबित हो रहा है। युवाओं ने यहां करीब 10 कीपैड मोबाइल फोन और बैटरियां उपलब्ध कराई हैं। साथ ही मोबाइल चार्ज करने की व्यवस्था भी की गई है। यह व्यवस्था सोलर बैटरियों की मदद से चल रही है। काठमांडू के रहने वाले 27 वर्षीय रोशन और 24 वर्षीय शुगम इस पहल में शामिल युवाओं में हैं। स्वयंसेवकों के मुताबिक, बाढ़ के बाद अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में बिदुर पहुंचे कई लोगों की वे अब तक मदद कर चुके हैं। उनका उद्देश्य ऐसे लोगों को कम से कम अपने परिवार और परिचितों से संपर्क करने का माध्यम उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपने प्रियजनों के बारे में कोई जानकारी मिल सके।

पहचान नहीं हो पाने वाले शवों के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार को फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि बाढ़ में मारे गए लोगों के शवों और अज्ञात शवों का प्रबंधन कानून और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन शवों का प्रबंधन कर रही है, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है। ऐसे शवों से डीएनए नमूने और अन्य जरूरी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं, ताकि आगे चलकर उनकी पहचान की जा सके। प्रधानमंत्री के मुताबिक, नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की मदद से शवों का प्रबंधन किया जा रहा है। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा रहा है। बाढ़ की इस त्रासदी के बीच बिदुर के युवाओं की पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण किरण बन गई है, जो अब भी अपने लापता परिजनों की खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

सीजी कॉर्प ग्लोबल ने 15 करोड़ रुपये की सहायता देने का संकल्प लिया
नेपाल में पिछले सप्ताह आई भीषण बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस स्थिति ने प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। सीजी कॉर्प ग्लोबल के प्रबंध निदेशक डॉ. वरुण चौधरी ने बाढ़ से पैदा हुई स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मृतकों और लापता लोगों की बढ़ती संख्या बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि उनके फाउंडेशन और बैंक की ओर से राहत सामग्री, अस्थायी घर और स्कूल बनाने के लिए 15 करोड़ रुपये की सहायता देने का संकल्प लिया गया है। डॉ. वरुण चौधरी ने संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से नेपाल को दी जा रही सहायता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नेपाल में आपदा की स्थिति में हमेशा की तरह सबसे पहले मदद पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि भारत की ओर से चार विमान करीब 70 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचे। इसके अलावा सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। उन्होंने कहा कि भारत की सहायता दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है।

नेपाल त्रासदी: मृतकों का आंकड़ा 1127 पहुंचा, 4800 से अधिक लोग अभी भी लापता; भारत की पांचवीं मदद रवाना
नेपाल में भीषण बाढ़ और अचानक आई फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। नेपाल पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, जबकि बरामद किए गए शवों की पहचान का काम भी चल रहा है। नेपाल पुलिस के अनुसार, अलग-अलग जिलों से अब तक बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। रसुवा में 45, नुवाकोट में 155, धादिंग में 59, चितवन में 348, गोरखा में 66, तनहूं में 38, नवलपरासी ईस्ट में 217 और नवलपरासी वेस्ट में 190 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा भारत में भी नेपाल बाढ़ से जुड़े नौ शव बरामद किए गए हैं।

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