ब्रिटिश काल में बना बांध, 100 साल पुरानी तकनीक आज भी कारगर
रायपुर । प्रदेश में लगातार बारिश का असर बांधों में दिखने लगा है। धमतरी जिले का ऐतिहासिक माडमसिल्ली बांध 100 फीसदी भर चुका है, जिसके बाद इसका साइफन सिस्टम एक्टिव हो गया है। जलस्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचने पर बांध के साइफन स्पिलवे से पानी की निकासी शुरू हो गई है। ऑटोमेटिक खुलते साइफन गेट और तेजी से बाहर निकलते पानी का नजारा बेहद आकर्षक नजर आ रहा है। 3836 क्यूसेक पानी साइफन सिस्टम से निकल रहा है जो गंगरेल बांध में जा रहा है।
ब्रिटिश काल में बना बांध
माडमसिल्ली बांध धमतरी जिले के सबसे अनोखे और ऐतिहासिक बांधों में शामिल है, इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीक है। ब्रिटिश काल में वर्ष 1914 से 1923 के बीच इस बांध का निर्माण कराया गया था। सौ साल से अधिक पुराना होने के बावजूद बांध की तकनीक आज भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
साइफन सिस्टम है बांध की सबसे बड़ी खासियत
माडमसिल्ली बांध में ऑटोमेटिक साइफन सिस्टम लगाया गया है। बांध में पानी का स्तर निर्धारित सीमा तक पहुंचने पर यह सिस्टम अपने आप सक्रिय हो जाता है और पानी की निकासी शुरू हो जाती है. इसके लिए अलग से गेट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। यही खास तकनीक माडमसिल्ली बांध को दूसरे बांधों से अलग पहचान देती है।
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34 साइफन स्पिलवे
माडमसिल्ली बांध में करीब 34 साइफन स्पिलवे होने की जानकारी है। बारिश के मौसम में जब बांध का जलस्तर बढ़ता है, तो साइफन सिस्टम सक्रिय होकर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालता है। इस दौरान साइफन से निकलता पानी और एक साथ खुलते ऑटोमेटिक गेट बांध के नजारे को बेहद खूबसूरत बना देते हैं।
100 साल से ज्यादा पुरानी इंजीनियरिंग आज भी प्रभावी
माडमसिल्ली बांध सिर्फ जलसंचय का महत्वपूर्ण केंद्र ही नहीं, बल्कि पुराने दौर की इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण भी है। करीब एक सदी से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी बांध में इस्तेमाल की गई साइफन तकनीक आज भी बारिश के दौरान प्रभावी तरीके से काम करती है।
