राष्ट्रीय जल मंच पर छत्तीसगढ़ का बढ़ा गौरव, ‘कैच द रेन’ सत्र की समापन प्रस्तुति की मिली जिम्मेदारी

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रायपुर। जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 1 और 2 सितंबर को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ को अहम जिम्मेदारी मिली है। देशभर के जल संसाधन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘कैच द रेन’ यानी जल संरक्षण और जनभागीदारी विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सत्र के समापन प्रस्तुतीकरण का दायित्व छत्तीसगढ़ को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दो दिवसीय दिल्ली दौरे के दौरान जल सुरक्षा से जुड़े इस राष्ट्रीय मंथन में राज्य की ओर से जल संरक्षण, नवाचार और जनभागीदारी के मॉडल को देश के सामने रखा जाएगा।

राष्ट्रीय सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा नामित छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री 30 मिनट का समापन प्रस्तुतीकरण देंगे। इसमें राज्य की जल संरक्षण संबंधी कार्य-संस्कृति, ‘5 प्रतिशत मॉडल’, ‘मोर गांव-मोर पानी’ जैसे अभियानों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की जाएगी। ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में 24.07 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण को गति मिली है। वहीं किसानों द्वारा स्वेच्छा से अपनी भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण एवं संरक्षण संरचनाओं के लिए समर्पित करने वाले मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ को मिली यह जिम्मेदारी प्रदेश के उन लाखों लोगों के प्रयासों का सम्मान है, जिन्होंने जल संरक्षण को जनअभियान का रूप दिया है। किसानों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से राज्य में जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की दिशा में काम हुआ है। सम्मेलन में जल अधोसंरचना, पेयजल स्रोतों की स्थिरता और ग्रामीण पेयजल उपलब्धता जैसे विषयों पर भी राज्यों की प्रस्तुतियां होंगी। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और भविष्य की जल सुरक्षा को लेकर भी मंथन किया जाएगा।