नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उज़्बेकिस्तान तथा किर्गिज़ गणराज्य की उनकी यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी मज़बूत होंगी और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि के साझा प्रयासों को बल मिलेगा। मोदी ने दोनों देशों की चार दिन की यात्रा पर रवाना होने से पहले शनिवार को एक वक्तव्य में कहा कि वह राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के निमंत्रण पर 29 और 30 अगस्त को राजकीय यात्रा के लिए ताशकंद में रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के साथ द्विपक्षीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए उत्सुक हैं।
उन्होंने कहा हाल के वर्षों में भारत-उज़्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मैं राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा, ऊर्जा में हमारे सहयोग को और गहरा करने तथा विकसित भारत और यांगि उज़्बेकिस्तान के हमारे साझा दृष्टिकोणों को आगे बढ़ाने पर अपनी चर्चाओं को लेकर उत्सुक हूँ। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ में शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे, जो दोनों देशों को जोड़ने वाले घनिष्ठ सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों के प्रति एक श्रद्धांजलि है।
मोदी ने कहा कि ताशकंद से वह किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बिश्केक की यात्रा करेंगे जो इस महत्वपूर्ण संगठन के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। भारत 2017 से एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। उन्होंने कहा, मैं क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूँ, जो सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित है, और ऐसे क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूँ जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के संकट से मुक्त हो, जो हमारे पड़ोस और उससे आगे शांति और स्थिरता के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राष्ट्रपति झापारोव और अन्य एससीओ नेताओं से मिलने तथा छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए भी उत्सुक हैं जो मध्य एशिया की समृद्ध जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसका भारत गहरा सम्मान करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी। उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि यह यात्रा मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करेगी, क्षेत्र के साथ हमारे सभ्यतागत जुड़ाव को गहरा करेगी, और शांति, स्थिरता तथा समृद्धि की हमारी साझा खोज को आगे बढ़ाएगी—वे मूल्य जो विश्व के साथ भारत के जुड़ाव के केंद्र में हैं।
