शेयर मार्केट: विदेशी निवेशकों का रुख बदला, फाइनेंस-ऑटो शेयरों पर बढ़ा दांव

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नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते बाजार परिदृश्य के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी निवेश रणनीति में तेजी से बदलाव किया है। एनएसडीएल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 अगस्त, 2026 के दौरान कुल शुद्ध प्रवाह बढ़कर 16,618 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह पिछले पखवाड़े (16-31 जुलाई) के 4,642 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।

विदेशी निवेशकों ने अब भारी कर्ज और लंबे निवेश चक्र वाले पूंजी-गहन क्षेत्रों से पैसा निकाला है। इसके बजाय, उन्होंने उच्च-तरलता, स्थिर नकदी प्रवाह और रक्षात्मक अपील वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें वित्तीय, ऑटो और उपभोक्ता शेयर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इस बदलाव से भारतीय बाजार में इन क्षेत्रों में मजबूत खरीदारी का रुख देखने को मिला है। हालांकि, दूरसंचार जैसे कुछ क्षेत्रों से निवेशकों का मोहभंग जारी है।

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क्या वित्तीय क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बढ़ी है?
अगस्त के पहले पखवाड़े में वित्तीय क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बना। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में 2,669 करोड़ रुपये निकालने के बाद, अगस्त की शुरुआत में उन्होंने 6,535 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यह कुल क्षेत्रीय प्रवाह का लगभग 40 फीसदी है। एसबीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर लंबे समय से बना बिकवाली का दबाव अब हल्का हो गया है। विदेशी निधियां दोबारा इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। इससे पहले मार्च से मई के दौरान इस क्षेत्र से 12,303 करोड़ रुपये की भारी निकासी हुई थी।

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किन अन्य क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों ने दांव लगाया?
विदेशी निवेशकों ने ऑटो शेयरों में अपनी खरीदारी लगभग दोगुनी कर दी है, जो 4,405 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। पिछले पखवाड़े में यह 2,372 करोड़ रुपये थी। घरेलू खपत के दम पर उपभोक्ता सेवाओं में 3,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी 2,910 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश देखा गया। सूचना प्रौद्योगिकी में 2,530 करोड़ रुपये और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में 1,472 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। धातु एवं खनन तथा तेल एवं गैस में भी क्रमशः 720 करोड़ रुपये और 490 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश रहा।

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