पीएम मोदी के बयान पर अभिजीत दीपके का पलटवार, पूछा- क्या केस भी वापस होंगे?

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गाली देने वालों को माफ करने वाले बयान के बाद अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी के इस संदेश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल कैमरे तक सीमित है या फिर सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को भी वापस लेने पर विचार करेगी। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने जंतर-मंतर पर हुई कथित अभद्र भाषा और गाली-गलौज की घटना पर चिंता जताई थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस तरह की भाषा देश की संस्कृति के खिलाफ है और इससे देश की छवि प्रभावित होती है। हालांकि, उन्होंने ऐसा करने वालों को भटका हुआ बताते हुए उन्हें माफ करने की बात भी कही थी।

प्रधानमंत्री के इसी वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री ने माफ कर दिया है तो क्या सरकार भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लिए जाएंगे या फिर माफी सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो तक ही सीमित रहेगी। दीपके ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री की ओर से माफी का संदेश दिया गया है तो सरकार को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या उन लोगों को कानूनी राहत मिलेगी जिनके खिलाफ प्रदर्शन या बयानबाजी को लेकर मामले दर्ज किए गए हैं।

गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह वीडियो उस समय सामने आया जब एक छात्रा के खिलाफ प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर मामला दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में उस छात्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। छात्रा ने खुद को 15 वर्ष का बताते हुए कहा था कि उसे अपनी गलती का पछतावा है और यह उसकी पहली तथा आखिरी गलती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो में कहा था कि जंतर-मंतर पर हुई घटना बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा का जिक्र करते हुए इसे देश की संस्कृति के लिए चिंता का विषय बताया था। उन्होंने कहा था कि न केवल उन्हें बल्कि उनकी मां को भी अपशब्द कहे गए, लेकिन उन्होंने ऐसे लोगों को माफ कर दिया है।

इसके अलावा अभिजीत दीपके ने पहले भी प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि क्या देश में कानून का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों के लिए अलग तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा नेताओं और भाजपा आईटी सेल से जुड़े कुछ लोगों पर भी सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर कार्रवाई हो रही है तो फिर अन्य मामलों में भी समान कार्रवाई होनी चाहिए।

दीपके ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो खुद को भाजपा समर्थक बताते हैं और कथित तौर पर महिलाओं तथा अन्य लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी उसी तरह की कार्रवाई कब होगी। वहीं, पीएम मोदी के बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। जहां भाजपा समर्थक इसे प्रधानमंत्री की उदार सोच और क्षमा भावना बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता इसे लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

अभिजीत दीपके का ताजा बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रदर्शन या आपत्तिजनक बयान से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की कोई योजना है या नहीं। इस मुद्दे पर आगे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।