रायपुर। राजधानी रायपुर में सुरक्षित, सुगम और अनुशासित यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने जनसहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में यातायात सभागार में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर चर्चा करना तथा सामाजिक संगठनों को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ना था। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में एनजीओ के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, जिससे नागरिकों में यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न एनजीओ प्रतिनिधियों ने प्रमुख मार्गों, व्यस्त चौराहों, बाजार क्षेत्रों और स्कूलों के आसपास यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव रखे। प्रतिनिधियों ने सड़क सुरक्षा, पैदल यात्रियों की सुविधा, पार्किंग व्यवस्था, ट्रैफिक सिग्नलों के बेहतर संचालन और जनजागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने पर भी अपने विचार साझा किए। डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा ने कहा कि सुरक्षित यातायात व्यवस्था केवल पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब आम लोग सड़क सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तभी यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव होगा। इसी सोच के साथ पुलिस कमिश्नरेट लगातार जनसहभागिता आधारित पहल को बढ़ावा दे रहा है।
बैठक के दौरान डीसीपी ट्रैफिक ने यातायात पुलिस द्वारा पहले से संचालित विभिन्न नवाचारों और जनजागरूकता अभियानों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि यातायात पुलिस समय-समय पर स्कूल प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और विभिन्न संस्थाओं के साथ बैठकें आयोजित करती रही है। इसके अलावा नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन संचालन रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। स्कूलों में सड़क सुरक्षा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं तथा स्कूल बसों की नियमित जांच और निरीक्षण भी किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से शहर के स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में संयुक्त रूप से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में यातायात पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी सक्रिय रूप से शामिल होंगे तथा विद्यार्थियों, वाहन चालकों और आम नागरिकों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक करेंगे।
डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने कहा कि यातायात पुलिस का उद्देश्य केवल नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों से प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और व्यवहारिक सुझावों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे शहर की यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उन्होंने सभी स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने में पुलिस का सहयोग करें। उनका कहना था कि यदि पुलिस और समाज मिलकर कार्य करें तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और रायपुर को यातायात अनुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श शहर बनाया जा सकता है। बैठक में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (प्रोटोकॉल) पीतांबर पटेल, सहायक पुलिस आयुक्त स्नेहिल साहू, रमेश येरेवार, सतीश ठाकुर और सीमा अहिरवार सहित लगभग 30 स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभी प्रतिभागियों ने यातायात सुधार के लिए पुलिस के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई और भविष्य में जनजागरूकता अभियानों को व्यापक स्तर पर संचालित करने का भरोसा दिया। रायपुर पुलिस की यह पहल इस बात का संकेत है कि अब यातायात व्यवस्था को केवल कानून लागू करने के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग के माध्यम से बेहतर बनाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आने वाले समय में शहर में सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
