पत्नी की हत्या करने वाले पति को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम जगन्नाथपुर में मटन नहीं पकाने की बात को लेकर पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी पति को अपर सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी हीरालाल टेकाम उर्फ भेंटन (48 वर्ष) को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

अपर सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश सिंह चौहान की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का कृत्य बेहद क्रूर और अमानवीय था। हालांकि, मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर इसे ‘विरले से विरलतम’ यानी Rarest of Rare श्रेणी में नहीं माना गया। इसलिए आरोपी को मृत्युदंड देने के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाना उचित माना गया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। आरोपी 28 नवंबर 2024 से न्यायिक अभिरक्षा में है। न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 468 के तहत जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 27 नवंबर 2024 की रात ग्राम जगन्नाथपुर में हुई थी। आरोपी हीरालाल टेकाम शराब के नशे में मटन लेकर घर पहुंचा था। उसने अपनी पत्नी पूनम टेकाम से मटन पकाने के लिए कहा, लेकिन पत्नी ने किसी कारण से मटन बनाने से इनकार कर दिया। इस बात से आरोपी नाराज हो गया और गुस्से में आकर उसने पत्नी पर हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने चूल्हे से सरई की जलती हुई लकड़ी निकाली और पत्नी के साथ बेरहमी से मारपीट की। हमले में पूनम टेकाम गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद आरोपी की मां रामो और उसके मासूम बेटे पप्पू टेकाम ने घायल महिला को कमरे में लिटाया, लेकिन आरोपी ने अपना व्यवहार नहीं बदला।

अभियोजन के मुताबिक, घायल पत्नी दर्द से तड़पती रही और आरोपी घर के अंदर जाकर मटन पकाकर खाता रहा। इसके बाद वह आराम से सो गया। अगले दिन सुबह पूनम टेकाम मृत अवस्था में मिली, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया था। तत्कालीन चौकी प्रभारी खड़गवां सहायक उपनिरीक्षक योगेन्द्र जायसवाल और उनकी टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए थे।

पुलिस ने घटनास्थल से रक्तरंजित मिट्टी, मृतका के कपड़े, आरोपी की टी-शर्ट और हत्या में इस्तेमाल की गई जलती लकड़ी को जब्त किया था। इन सभी साक्ष्यों को जांच के लिए एफएसएल अंबिकापुर भेजा गया था। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी अहम साबित हुई। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर निमेश गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मृतका के शरीर में गंभीर अंदरूनी चोटें थीं। चोट के कारण उसकी प्लीहा यानी स्प्लीन फट गई थी, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और हिमोरैजिक शॉक के कारण उसकी मौत हो गई।

वहीं एफएसएल रिपोर्ट में घटनास्थल से जब्त मिट्टी, मृतका के कपड़ों और आरोपी की टी-शर्ट पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई। वैज्ञानिक साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया और अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना। मामले में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अक्षय तिवारी ने पैरवी की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन के आधार पर आरोपी को सजा दिलाने में सफलता मिली। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई और न्यायालय के निर्णय की सराहना की है। अदालत के इस फैसले को घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों में गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।