मीराबाई चानू का तीसरा स्वर्ण पदक- संजय सक्सेना

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भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेल यानि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया है। उन्होंने विमेंस वेटलिफ्टिंग की 48 किलोग्राम वजन वाली कैटेगरी में कुल 190 किलो वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 85 किलो और क्लीन एंड जर्क में 105 किलो वजन उठाया। मीराबाई का यह पहला स्वर्ण नहीं, अपितु लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड है। उन्होंने 2018 के गोल्डकोस्ट और 2022 के बर्मिंघम गेम्स में भी गोल्ड जीता था। वे ग्लासगो गेम्स 2014 में सिल्वर भी जीत चुकी हैं। टोक्यो ओलिंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई स्नैच के पहले प्रयास में 82 किलो वजन नहीं उठा पाई। इसके बाद उन्होंने दूसरे में 82 और तीसरे में 85 किलो उठाकर कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बना दिया। चानू क्लीन एंड जर्क में भी पहला प्रयास चूक गईं। उन्होंने दूसरे प्रयास में 105 किलो उठाकर गोल्ड अपने नाम किया। मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त, 1994 को इम्फाल के पास नोंगपोक काकचिंग में हुआ था। मीरा मैतेई योद्धा समुदाय से आती हैं। उनमें बचपन से ही गजब की ताकत थी, वह इतना भारी सामान उठा लेती थीं जिसे उठाने में उनके बड़े भाई को भी मुश्किल होती थी। मीराबाई मणिपुर पुलिस में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (स्पोर्ट्स) के पद पर तैनात हैं। मीराबाई की माता का नाम साइकोहं ऊँगबी तोम्बी लीमा है जो पेशे से एक दुकानदार हैं, पिता का नाम साइकोहं कृति मैतेई है जो लोक निर्माण विभाग में नौकरी करते हैं। मीराबाई 12 वर्ष की उम्र में ही लकडिय़ों के गुच्छे उठाकर अभ्यास किया करती थी। उन्होंने 2008 में मणिपुर की स्पोर्ट्स अकादमी में वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक तंगी के बावजूद वह ट्रेनिंग के लिए रोजाना ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट लेकर इम्फाल जाती थीं। मीराबाई ने तीन साल बाद अपना पहला नेशनल टूर्नामेंट खेला और 2011 में बैंगलोर में नेशनल कैंप में शामिल हुईं। ्रचानू ने 2014 राष्ट्रमण्डल खेल में 48 किग्रा श्रेणी में रजत पदक जीता तथा गोल्ड कोस्ट में हुए 2018 संस्करण में विश्व कीर्तिमान के साथ स्वर्ण पदक जीता। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2017 में अनाहाइम, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित हुई विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना था। चानू ने 24 जुलाई 2021 को ओलम्पिक में 49 किग्रा भारोत्तोलन मेंं भारत के लिए पहला रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 87 किग्रा भार उठाते हुए,क्लीन एंड जर्क में 115 किग्रा सहित कुल 202 किलोग्राम वजन उठा कर रजत पदक पर कब्ज़ा किया। चानू ने टोक्यो ओलम्पिक 2020 (2021) में भारत को पहला पदक दिलाकर पदक तालिका में खाता खोला। कर्णम मल्लेश्वरी (कांस्य पदक सिडनी ओलंपिक 2000) के बाद चानू वेटलिफ्टिंग मे पदक जीतने वाली दूसरी व भारत की ओर से रजत पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय वैटलिफ्टर बन गई है। चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वयं के 186 किलोग्राम रिकॉर्ड को तोडकऱ 202 किलोग्राम का नया कीर्तिमान स्थापित किया। इन्होंने ग्लासगो में हुए 2014 राष्ट्रमण्डल खेलों में भारोत्तोलन स्पर्धा के 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक प्राप्त किया। उन्होंने कुल 170 किलो वजन उठाया, जिसमें 75 स्नैच में और 95 क्लीन एण्ड जर्क में था। ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में आयोजित 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया, किंतु क्लीन एण्ड जर्क में तीनों प्रयास असफल रहने के बाद वह पदक जीतने में असफल रहीं। 2017 में उन्होंने महिला महिला 48 किग्रा श्रेणी में 194 किग्रा (85 किग्रा स्नैच तथा 109 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क) का भार उठाकर 2017 विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप, अनाहाइम, कैलीफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वर्ण पदक जीता। चानू ने 196 किग्रा, जिसमे 86 किग्रा स्नैच में तथा 110 किग्रा क्लीन एण्ड जर्क में था, का वजन उठाकर भारत को 2018 राष्ट्रमण्डल खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इसके साथ ही उन्होंने 48 किग्रा श्रेणी का राष्ट्रमण्डल खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। मीराबाई चानू ने लगातार दूसरी बार भारत को कामनवेल्थ खेलों में वर्ष 2022 में 30 जुलाई 2022 को स्वर्ण पदक दिलाया। एक बहुत ही सामान्य परिवार में पैदा हुई मीराबाई ने लगातार देश का नाम रौशन किया है। जिस वेटलिफ्टिंग खेल में बढ़ती उम्र के साथ लोग हथियार डाल देते हैं या थक कर बैठ जाते हैं, मीराबाई चानू लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। यह अनुकरणीय उदाहरण है हमारी नई पीढ़ी के लिए, मीराबाई चानू अपने परिवार के साथ ही नौकरी की जिम्मेदारी भी उतनी ही निष्ठा के साथ निभा रही हैं, जिस समर्पण के साथ वह इस खेल में अपनी प्रतिभा को लगातार निखार रही हैं। मीराबाई जैसी महिलाएं यह साबित करती हैं कि प्रतिभा परिस्थितियों के बोझ में दबती नहीं है, निखरती है। एक लक्ष्य तय करके यदि संघर्ष किया जाए, तो उसमें भले ही देर से मिले, सफलता अवश्य मिलती है। यदि आत्मविश्वास है तो उम्र और हालात की बाधाएं आसानी से पार की जा सकती हैं। हमारे देश में ऐसे अनेक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं छोड़ी और अपनी प्रतिभाओं को चमकाकर देश का नाम रोशन किया है। हमे मीराबाई चानू और अन्य खेल प्रतिभाओं पर गर्व है।