नई दिल्ली। विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार अहम है, लेकिन कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी भी तरह की ज्यादती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से पेलेट गन, कील लगी लाठियों और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल जैसे आरोपों को गंभीर बताया। पीठ ने कहा कि अगर पुलिस कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो निष्पक्ष जांच के जरिए जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मामला केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में हुए प्रदर्शनों से जुड़ा है। वकीलों ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा किए जाने और लोगों को लंबे समय तक हिरासत में रखने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। बिहार में नाबालिगों की हिरासत का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया। कोर्ट ने सभी आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पारदर्शी जांच और दोषियों की जवाबदेही पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी कार्रवाई में कानून और नागरिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
