छत्तीसगढ़ डीएड अभ्यर्थियों का संघर्ष अब राष्ट्रीय स्तर पर: शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुंकार*

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रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के हजारों डीएड (D.Ed) अभ्यर्थी पिछले 210 दिनों से अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हैं। न्याय की उम्मीद में शुरू हुआ यह आंदोलन अब छत्तीसगढ़ की सीमाओं को पार कर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुँच गया है। छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में डटा हुआ है।

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: 210 दिन से सड़कों पर युवा*
राज्य सरकार की लचर कार्यप्रणाली और शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण प्रदेश के शिक्षित युवा पिछले 210 दिनों से सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग नियुक्तियां देने में विफल रहा है। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की विफलता का ही परिणाम है कि योग्य अभ्यर्थी अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं और उनका भविष्य अंधकार में है।

दिल्ली में एकजुटता: सोनम वांगचुक के आंदोलन और नीट पीड़ितों को समर्थन*
जंतर-मंतर पर मौजूद छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थियों ने शिक्षा व्यवस्था की विफलता के खिलाफ चल रहे राष्ट्रीय आंदोलनों के साथ अपनी आवाज मिला दी है। प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में ‘नीट’ (NEET) परीक्षा के कारण आत्महत्या करने वाले 21 छात्रों की दुखद मौतों पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसे देश की शिक्षा प्रणाली का ‘संस्थागत पतन’ करार दिया है। अभ्यर्थी सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे जन-आंदोलन का समर्थन करते हुए यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक देश का युवा अपनी पढ़ाई के बदले अपनी जान और अपना भविष्य दांव पर लगाता रहेगा?

*मुख्य मांगें:*
1.केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:* देश भर में नीट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हुई धांधली और छात्रों की लगातार हो रही आत्महत्याओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अविलंब इस्तीफा देना चाहिए।

2. छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का इस्तीफा:* राज्य में डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्तियों में देरी, अदालत के आदेशों की अवमानना और शिक्षा विभाग को सुचारू रूप से न चला पाने में विफल रहने के कारण प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

3.तत्काल नियुक्ति पत्र:* छत्तीसगढ़ सरकार बिना किसी और देरी के न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करे।

अभ्यर्थियों का संदेश:*
दिल्ली में मौजूद छत्तीसगढ़ के डीएड प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया है कि, “यह केवल हमारी नियुक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश के उस हर युवा की लड़ाई है जिसे व्यवस्था ने पिसने के लिए छोड़ दिया है। छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग पूरी तरह विफल हो चुका है। यदि सरकार हमें नियुक्तियां नहीं दे सकती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं कर सकती, तो मंत्री महोदय को नैतिकता के आधार पर कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।”

डीएड अभ्यर्थी अपने साथियों के साथ तब तक संघर्ष जारी रखेंगे जब तक कि न्याय नहीं मिल जाता और जिम्मेदार मंत्रियों की जवाबदेही तय नहीं होती।