उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य इस समय मानसून और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर (घाटी) में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, मुख्य हाईवे से लेकर सैकड़ों लिंक रोड बंद हैं और लोग लगातार मलबे व भूस्खलन के डर के साये में जीने को मजबूर हैं। बिगड़ते हालातों को देखते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। दक्षिण कश्मीर में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है, जहां दो अलग-अलग प्रसिद्ध इलाकों में अचानक बादल फटने से नदी-नालों में भयंकर सैलाब आ गया। मटमैले पानी के तेज बहाव को देखकर निचले इलाकों और तटों पर कुछ समय के लिए घबराहट का माहौल बन गया। गनीमत रही कि पहलगाम तट पर स्थित प्रमुख होटलों में ठहरे देश-विदेश के सभी पर्यटक सुरक्षित हैं। आपदा प्रबंधन, पुलिस और राजस्व विभागों को पूरी तरह सतर्क मोड पर रखा गया है। संवेदनशील और निचले इलाकों में बचाव और निगरानी टीमें तैनात कर दी गई हैं। उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुके हैं। राज्य में एक राष्ट्रीय राजमार्ग और दो स्टेट हाईवे समेत कुल 91 मुख्य मार्ग बंद हैं, जिससे आवाजाही ठप हो गई है।
नदियों का बढ़ता जलस्तर
राज्य के 11 बांध और बैराजों में जल स्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी, कोटेश्वर-रुद्रप्रयाग में अलकनंदा (बदरीनाथ के पास) का जलस्तर तेजी से बढ़ा, हालांकि बाद में इसमें मामूली कमी दर्ज की गई है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का जलस्तर फिलहाल घट रहा है, लेकिन खतरा टला नहीं है।
अचानक आई बाढ़
पहली घटना अनंतनाग जिले के चित्रगुल के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में हुई, जिससे नाला आरपत चित्रगुल शांगस में अचानक बाढ़ आ गई। इसके तुरंत बाद पर्यटन स्थल पहलगाम के नाला आवूरा में भी बादल फटा, जिससे पानी का स्तर डरावनी तेजी से बढ़ गया।
सबसे प्रभावित जिले
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) सडक़ों को खोलने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लगातार गिरते मलबे से बाधा आ रही है। सबसे बदतर हालात पौड़ी गढ़वाल (21 मार्ग बंद) और चमोली (19 मार्ग बंद) में हैं। इसके अलावा टिहरी में 17 और पिथौरागढ़ में 10 सडक़ें बंद हैं।
