नई दिल्ली। भारत के इतिहास में कई ऐसे किले हैं, जो अपनी भव्यता और रहस्यों के लिए मशहूर हैं, लेकिन महाराष्ट्र का मुरुड-जंजिरा किला अपनी अलग पहचान रखता है। अरब सागर के बीचों-बीच बना यह 450 साल पुराना किला आज भी अपनी मजबूती और अजेय इतिहास के लिए जाना जाता है। मुगल, मराठा, पुर्तगाली और अंग्रेजों ने इस किले पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी इसे जीत नहीं पाया।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड तट के पास स्थित यह किला कभी समुद्री सुरक्षा का मजबूत केंद्र हुआ करता था। इसकी नींव 15वीं शताब्दी में मछुआरों द्वारा बनाए गए छोटे लकड़ी के किले से पड़ी थी। बाद में अहमदनगर सल्तनत के सेनापति मलिक अंबर ने 1567 में इसे विशाल पत्थर के किले में बदल दिया।
समुद्री व्यापार मार्ग पर होने के कारण मुरुड-जंजिरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था। सोना, रेशम, हाथी दांत और घोड़ों के व्यापार की सुरक्षा में इसकी अहम भूमिका थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस किले को जीतने का प्रयास किया, लेकिन इसकी मजबूत दीवारों और अभेद्य सुरक्षा के कारण सफलता नहीं मिली। आज यह किला इतिहास और रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। राजापुरी जेट्टी से नाव के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है।
