रायपुर। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत डीजे बजाने से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामला रायपुर में गणेश स्थापना और विसर्जन के दौरान कथित ध्वनि प्रदूषण उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें कुल 1.05 करोड़ रुपये की आर्थिक पेनल्टी लगाने की मांग की गई थी। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के बाद कई पर्यावरणीय उल्लंघनों के लिए आपराधिक कार्रवाई की जगह आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत अधिनियम में धारा 15C जोड़ी गई है और प्रत्येक राज्य में निर्णायक अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में यह जिम्मेदारी आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को दी गई है।
रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि संशोधित प्रावधानों के अनुसार पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन अतिरिक्त दंड का भी प्रावधान है। मामले के अनुसार, वर्ष 2023 में रायपुर के शंकर नगर चौक में गणेश स्थापना और विसर्जन के दौरान अवंती विहार निवासी विक्की शदीजा द्वारा नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स का सात बार उल्लंघन किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता संदीप तिवारी ने निर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर प्रत्येक उल्लंघन के लिए 15-15 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.05 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाने की मांग की थी।
इसके अलावा करबला तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के कथित उल्लंघन को लेकर भी शिकायत दाखिल की गई थी। इसमें संबंधित अधिकारी पर एक माह के वेतन के बराबर दंड लगाने की मांग की गई थी। डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, दोनों मामलों में निर्णायक अधिकारी ने शिकायतों के गुण-दोष पर निर्णय देने के बजाय यह कहते हुए प्रकरण खारिज कर दिए कि पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। इन आदेशों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की गईं।
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद WPC 3568/2026 और WPC 3456/2026 मामलों में निर्णायक अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब अदालत के सामने यह महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है कि क्या नियमों की अनुपस्थिति के आधार पर पर्यावरणीय उल्लंघनों पर आर्थिक दंड लगाने की कार्रवाई रोकी जा सकती है या नहीं। डॉ. गुप्ता का कहना है कि यदि पेनल्टी व्यवस्था को लागू नहीं किया गया तो पर्यावरण संरक्षण कानून का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है। उनका मानना है कि आर्थिक दंड की यह व्यवस्था ध्वनि प्रदूषण, वेटलैंड संरक्षण और अन्य पर्यावरणीय उल्लंघनों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



