क्रूड ऑयल सस्ता, फिर भी पेट्रोल- डीजल महंगा क्यों? कंपनियों के मुनाफे पर उठे सवाल

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मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत नहीं मिली है। क्रूड ऑयल के करीब छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भी आम लोगों को सस्ते ईंधन का इंतजार है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन बास्केट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है, जो पहले के उच्च स्तर से काफी कम है। इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। बताया जा रहा है कि सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा कीमतों पर प्रति लीटर करीब 10 से 11 रुपये तक का मार्जिन कमा रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार, जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी थीं, तब कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। लेकिन बाद में क्रूड सस्ता होने पर कीमतों में उसी अनुपात में कटौती नहीं हुई। कंपनियों का तर्क रहा कि पुराने नुकसान की भरपाई की जा रही है। वहीं, निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल में पेट्रोल और डीजल के दाम कम किए, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने कोई बदलाव नहीं किया। अब सवाल उठ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत मिलने के बावजूद इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक कब पहुंचेगा।