खाड़ी देशों की बढ़ी मांग से पोलाची का नारियल व्यापार फिर हुआ सक्रिय, ढुलाई लागत बनी बड़ी चुनौती

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चेन्नई। तमिलनाडु के पोलाची क्षेत्र में नारियल व्यापार को एक बार फिर विदेशी मांग से नई रफ्तार मिली है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और खाड़ी देशों से बढ़ती मांग के कारण नारियल निर्यात में सुधार देखा जा रहा है, जिससे किसानों और व्यापारियों को राहत मिली है। पिछले कुछ महीनों में निर्यात लगभग ठप होने से कारोबार प्रभावित हुआ था, लेकिन अब कोच्चि बंदरगाह के जरिए खाड़ी देशों से नई ऑर्डर और पूछताछ आने लगी है। इससे निर्यात गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं।

हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों के लिए ढुलाई लागत अब भी बड़ी चिंता बनी हुई है। शिपिंग खर्च और देरी के कारण कई खेपें प्रभावित हुईं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। पहले जहां रोजाना कई कंटेनर निर्यात होते थे, अब वह गति अभी पूरी तरह नहीं लौट पाई है। निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में नारियल की आपूर्ति बढ़ी, जिससे कीमतें घटकर करीब 40,000 रुपये प्रति टन पर आ गईं, जो पहले लगभग 65,000 रुपये प्रति टन थीं। किसानों को उम्मीद है कि, आने वाले महीनों में मांग और निर्यात बढ़ने से बाजार स्थिर होगा, हालांकि कम बारिश और पानी की कमी भविष्य की फसल को लेकर चिंता बढ़ा रही है।