बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा स्थित सीएनआई (चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया) चर्च की नई समिति के सात पदाधिकारियों के खिलाफ एक ईसाई परिवार का कथित सामाजिक बहिष्कार करने और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के आदेश के बाद कोटा पुलिस ने 2 जुलाई को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता हरीश लाल का आरोप है कि नई चर्च समिति के गठन के बाद से करीब दो वर्षों तक उन्हें और उनके परिवार को चर्च की गतिविधियों से दूर रखा गया। साथ ही सोशल मीडिया के जरिए समुदाय के लोगों से उनके परिवार से किसी भी प्रकार का सामाजिक संबंध न रखने की अपील की गई। शिकायत के अनुसार, इससे उनके सामाजिक जीवन के साथ-साथ मानसिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ा।
मामले में पास्टर मनीष आर. मसीह, सौरभ पीटर्स, राजा सोलोमन दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स और सुलेमान दास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 17 जनवरी को चर्च परिसर में हुई बैठक के बाद हरीश लाल और उनके परिवार को “नॉट इन गुड स्टैंडिंग” घोषित कर चर्च समुदाय से अलग कर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि यह निर्णय बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए लिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि रायपुर स्थित डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ के बिशप ने इस बहिष्कार को अवैध बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया था, लेकिन चर्च समिति ने उस निर्देश का पालन नहीं किया।
हरीश लाल ने यह भी आरोप लगाया कि मिशन कंपाउंड स्थित उनके कार गैराज के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया, जिससे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और आर्थिक नुकसान हुआ।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर की गई कथित अपील, चर्च समिति की निर्णय प्रक्रिया और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
