प्रधानमंत्री आवास योजना: मनरेगा, उज्ज्वला, जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं ने बनाया जीवन आसान

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रायपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर, विश्वासा बाई के पूरे हुए सुरक्षित आवास के सपने

रायपुर। सिर पर सुरक्षित छत और सम्मानजनक आवास हर परिवार का सपना होता है, लेकिन आर्थिक सीमाएं कई बार इस सपने को अधूरा छोड़ देती हैं। कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेन्हाभाठा निवासी विश्वासा बाई के जीवन में भी लंबे समय तक यही स्थिति रही। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए मजदूरी के सहारे जीवनयापन करना और कच्चे मकान में रहना उनकी मजबूरी बन गई थी। कच्चा घर हर मौसम में कठिनाइयों का कारण था। गर्मी में असहनीय ताप, सर्दियों में ठंडी हवाएं और बरसात में टपकती छत तथा घर में भरता पानी उनकी परेशानी को बढ़ा देता था। बरसात के दिनों में रातभर जागकर पानी निकालना पड़ता था और जहरीले जीव-जंतुओं का डर अलग बना रहता था। ऐसे हालात में पक्का घर उनके लिए केवल एक सपना था।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशानुसार संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत की। आवास प्लस सर्वे के माध्यम से पात्रता मिलने के बाद वर्ष 2025-26 में उनके आवास को स्वीकृति मिली। शासन से प्राप्त सहायता और प्रशासन के मार्गदर्शन से उन्होंने अपने पक्के घर का निर्माण शुरू किया और वर्षों का सपना साकार हो गया। आज विश्वासा बाई अपने नए पक्के घर में परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं। अब उन्हें बारिश, आंधी और मौसम की चिंता नहीं सताती। मजबूत और सुरक्षित आवास ने उनके परिवार को नया आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान की है।

आवास योजना के साथ-साथ उन्हें मनरेगा के तहत निर्माण कार्य में मजदूरी, स्वच्छ भारत मिशन से शौचालय, उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन से नल-जल सुविधा, बिजली, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और महतारी वंदन योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिला। इन सुविधाओं ने उनके जीवन को अधिक सुविधाजनक और बेहतर बनाया है। विश्वासा बाई कहती हैं कि, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि, उनका भी अपना पक्का घर होगा। आज अपने नए घर के आंगन में खड़े होकर उन्हें गर्व और संतोष का अनुभव होता है। वे शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन्हें केवल मकान नहीं मिला, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का विश्वास मिला है।