बिलासपुर। वेब सीरीज ‘पंचायत’ में ‘प्रधान जी’ के किरदार से लोकप्रिय हुए दिग्गज अभिनेता रघुवीर यादव बिलासपुर पहुंचे। यहां वह चार दिवसीय योगेश स्मृति नाट्य समारोह के तहत अपने चर्चित नाटक ‘पियानो’ के मंचन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उन्होंने रंगमंच, अभिनय, संगीत और भारतीय लोक संस्कृति पर खुलकर अपनी बात रखी।
पत्रकारों से बातचीत में रघुवीर यादव ने कहा कि थिएटर सिर्फ अभिनय का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी पाठशाला है। उन्होंने कहा कि हर स्कूल, कॉलेज और गांव में थिएटर की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि रंगमंच व्यक्ति को अनुशासन, संवेदनशीलता और आत्मविश्लेषण की सीख देता है। उन्होंने कहा, “थिएटर इंसान को खुद को पहचानने का अवसर देता है और उसके भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाता है। यहां से व्यक्ति सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि जीने का तरीका भी सीखता है।”
रघुवीर यादव ने बताया कि वह वर्ष 1967 से रंगमंच से जुड़े हुए हैं और आज भी खुद को सीखने वाला कलाकार मानते हैं। उन्होंने कहा कि अभिनय की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती और हर कलाकार के लिए थिएटर का प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “मैंने थिएटर में तैरना नहीं, बल्कि डूबना सीखा है। रंगमंच इंसान को अभिनय के साथ-साथ व्यवहार, संवाद, संवेदनशीलता और जीवन के हर छोटे-बड़े पहलू की समझ देता है।”
संगीत के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह तनाव कम करने के साथ मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी मदद करता है। इस दौरान उन्होंने प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर और सत्यदेव दुबे को याद करते हुए कहा कि हबीब तनवीर ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति ‘नाचा-गम्मत’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति, लोकगीत और परंपराएं हमारी असली पहचान हैं और नई पीढ़ी को उनसे जुड़ना चाहिए।
रघुवीर यादव ने फिल्मों और वेब सीरीज की भूमिका पर भी अपनी राय रखते हुए कहा कि इन माध्यमों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए कलाकारों और फिल्मकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी कहानियां प्रस्तुत करें जो समाज में सकारात्मक संदेश और संवेदनशीलता को बढ़ावा दें। बिलासपुर में उनके आगमन को लेकर रंगमंच प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। योगेश स्मृति नाट्य समारोह में उनकी प्रस्तुति का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है।
