देश के कोयला सेक्टर में ऐतिहासिक सुधार: पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बाजार के लिए ‘कोल एक्सचेंज’ स्थापित करने को मिली हरी झंडी

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नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा और कोयला कारोबार को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। देश में ‘कोल एक्सचेंज’ स्थापित करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जो भारतीय कोयला आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का एक नया युग लेकर आएगा। कोयला मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, हाल ही में लागू खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत पहली बार मिनरल एक्सचेंज की अवधारणा पेश की गई है। इसके तहत सरकार ने इसी महीने ‘कोल एक्सचेंज नियम, 2026’ को भी अधिसूचित कर दिया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी योजना को कानूनी और प्रशासनिक मजबूती मिली है।

इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (CCO) को नियामक प्राधिकरण नियुक्त किया है। CCO ही पात्र संस्थाओं को कोल एक्सचेंज स्थापित करने और संचालित करने का पंजीकरण देगा, जिसकी मान्यता 25 वर्षों के लिए होगी। यह पहल अब तक चली आ रही पारंपरिक ‘एक विक्रेता से कई खरीदार’ वाली एकाधिकार व्यवस्था को खत्म कर ‘कई विक्रेता और कई खरीदार’ वाला एक गतिशील और प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कोल एक्सचेंज के आने से कोयले की कीमतों का निर्धारण पूरी तरह बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर पारदर्शी तरीके से होगा। इससे न केवल वाणिज्यिक और कैप्टिव खदान संचालकों को सीधे बड़े खरीदार मिलेंगे, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों की बाजार में भागीदारी भी मजबूत होगी। मंत्रालय का मानना है कि यह सुधार सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलेगी और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई गति मिलेगी।