बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल उधार ली गई रकम वापस नहीं करना अपने आप में ठगी, आपराधिक विश्वासघात या आपराधिक षड्यंत्र का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में शुरुआत से ही धोखाधड़ी की मंशा साबित होना आवश्यक है। मामला बिल्हा क्षेत्र के व्यापारी संतोष बंसल से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि परिचित संदीप गर्ग और उनकी पत्नी प्रीति गर्ग ने बीमारी और व्यवसायिक जरूरत का हवाला देकर वर्ष 2022 में 25 लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में रकम वापस नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस और अदालत का रुख किया। न्यायालय ने पाया कि यह विवाद मूल रूप से धन-वसूली और लेनदेन से संबंधित है, जिसकी प्रकृति दीवानी (सिविल) है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल वादा पूरा न होने से धोखाधड़ी का अपराध सिद्ध नहीं होता। आपराधिक मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि लेनदेन की शुरुआत से ही धोखा देने की मंशा थी।
उधार की रकम न लौटाना मात्र से नहीं बनता ठगी का मामला, विशेष अदालत की अहम टिप्पणी
