हरित विकास और जल संरक्षण में मिसाल बना छत्तीसगढ़, जनभागीदारी से साकार हो रहा पर्यावरणीय समृद्धि का सपना

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रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और हरित विकास के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए जनभागीदारी आधारित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से जोड़ा गया है। हरियाली प्रसार योजना और किसान वृक्ष मित्र योजना के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया है।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऑक्सीवन योजना और पर्यावरण वानिकी योजना के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क, हरित क्षेत्र और पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से प्रदूषण नियंत्रण के साथ नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध हो रहा है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘मोर गांव मोर पानी’ और ‘मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान प्रभावी साबित हो रहे हैं। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और भूजल पुनर्भरण कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही नदी तट वृक्षारोपण और आर्द्रभूमि संरक्षण परियोजनाएं प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय हरित कोर योजना और ईको-क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। वृक्षारोपण, स्वच्छता और जल संरक्षण गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। राज्य सरकार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। हरियाली, जल संरक्षण और जनसहभागिता पर आधारित छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण की मजबूत नींव रख रहा है।