रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी प्रयास अब जमीन पर रंग लाने लगे हैं। इसका एक जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण सुदूर ग्रामीण अंचल से सामने आया है, जहाँ सहकारी समितियों (लैम्प्स) के सहयोग और एक किसान के कड़े परिश्रम ने मिलकर कामयाबी की नई गाथा लिख दी है। नारायणपुर जिले के ग्राम केरलापाल निवासी किसान देवलाल उसेंडी की यह सफलता की कहानी आज प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं के लिए एक नई राह दिखा रही है।
’चुनौतियों से घिरी थी आजीविका की राह’:
देवलाल उसेंडी के जीवन और आजीविका का मुख्य आधार कृषि ही है, लेकिन कुछ समय पहले तक उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। परंपरागत खेती करते हुए उन्हें हर सीजन में दोहरी मार झेलनी पड़ती थी। एक तरफ समय पर गुणवत्तापूर्ण उन्नत बीज नहीं मिल पाता था, तो दूसरी तरफ खाद के लिए भटकना पड़ता था। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों से ऊंचे दामों पर कृषि सामग्री खरीदनी पड़ती थी, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी। इतनी लागत लगाने के बाद भी घटिया बीज और असंतुलित खाद के कारण फसल का उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाता था, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा चिंता का विषय बनी रहती थी।
’लैम्प्स ने बदली तकदीर, मिला समय पर संबल’:
देवलाल के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब उन्हें पता चला कि क्षेत्रीय प्राथमिक साख सहकारी समिति (लैम्प्स) के माध्यम से किसानों को बेहद रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले खाद, उन्नत बीज और अन्य जरूरी कृषि आदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बिना देर किए देवलाल ने लैम्प्स समिति से संपर्क किया, जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की और अपनी जरूरत के अनुसार उन्नत बीज व खाद प्राप्त किया। समय पर और सही दाम में मिले इन संसाधनों ने देवलाल की खेती को एक नई और वैज्ञानिक दिशा दी।
देवलाल उसेंडी ने कहा कि पहले खाद-बीज के लिए भटकना पड़ता था और जेब भी ढीली होती थी। जब से लैम्प्स से नाता जुड़ा है, खेती आसान हो गई है। अब सही समय पर, सही दाम में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री मिल जाती हैं।
’वैज्ञानिक सूझबूझ और आधुनिक तकनीक का संगम’:
देवलाल ने संसाधन मिलने के बाद कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों के सुझावों को अपनाया। उन्होंने केवल बीज नहीं बोए, बल्कि उन्नत और प्रमाणित बीजों की किस्मों का सही चुनाव किया। अनुशंसित मात्रा में खाद का संतुलित प्रयोग किया। फसल की नियमित निगरानी की और आधुनिक कृषि तकनीकों को मैदानी स्तर पर लागू किया। इसका सकारात्मक असर जल्द ही खेतों में लहलहाती फसल के रूप में दिखने लगा। फसल की शानदार वृद्धि और उत्कृष्ट गुणवत्ता ने यह साफ कर दिया था कि इस बार का उत्पादन पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाला है।
’आर्थिक मजबूती और परिवार में खुशहाली’:
कटाई के बाद जब फसल बाजार पहुंची, तो बेहतर गुणवत्ता के कारण देवलाल को उपज के बेहतरीन दाम मिले। इससे उन्हें पूर्व वर्षों की तुलना में बम्पर मुनाफा और अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। इस बढ़ी हुई कमाई से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई, बल्कि उन्होंने इस पैसे का निवेश खेती को और आधुनिक बनाने के लिए नए उपकरणों की खरीदी में किया। साथ ही, परिवार की अन्य जरूरतों को भी अब वे बिना किसी कर्ज के आसानी से पूरा कर पा रहे हैं।
’ग्रामीण सशक्तिकरण के बने रोल मॉडल’:
आज देवलाल उसेंडी सिर्फ एक सफल किसान नहीं हैं, बल्कि वे अपने पूरे गांव और आस-पास के क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत बन चुके हैं। वे अब स्वयं आगे बढ़कर अन्य किसानों से भी अपील कर रहे हैं कि वे निजी दुकानदारों के चक्कर में पड़ने के बजाय शासकीय सहकारी संस्थाओं और लैम्प्स की सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।
