रायपुर। डोंगरगढ़ से एक लापरवाही का मामला सामने आया है। जिसमें चार सफाई कर्मचारियों को सेप्टिक टैंक में बिना किसी सुरक्षित उपकरण के उतर गया। पूरे मामले का उजागर होने के बाद राज्य सफाई कर्मचारी आंदोलन संघ ने पूरे प्रकरण का विरोध किया। संघ के राज्य संयोजक राजू भारतवासी ने बताया कि कर्मचारियों को बिना सुरक्षित उपकरण के सेप्टिक टैंक में उतरना गलत है। नगर पालिका परिषद डोंगरगढ़ के जिम्मेदार अधिकारियों पर एमएसएक्ट 2013, 2014 के तहत कानूनी कार्रवाई करने के लिए
कलेक्टर और थाना प्रभारी डोंगरगढ़ को आवेदन दिया गया है । कुछ दिन पहले ही रायपुर के सेप्टिक टैंक में तीन सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी। उसके बाद भी कई जिलों में इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। जो की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
*पूरा मामला क्या है*
डोंगरगढ़ नगर पालिका परिषद में 4 सफाई कर्मचारीयों को बिना सुरक्षित उपकरण के सेप्टिक टैंक की सफाई करवाया गया । जो कि किसी भी प्रकार का नियम संगत नहीं है। प्रदेश में इस प्रकार की कई घटनाएं होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के कारण इस प्रकार की घटनाओं को दोहराया जा रहा है। ऐसे में किसी मजदूर की जान जोखिम में डालना कहां तक सही है।
*मानव मल-मूत्र ढोने की प्रथा आज भी जारी*
राज्य सफाई कर्मचारी आंदोलन संघ के राज्य संयोजक राजू भारतवासी ने बताया कि 26 मई को डोंगरगढ़ नगर पालिका परिषद् के अंतर्गत 4 मानव बल सफाई कामगारों से मानव मल-मूत्र की बिना सुरक्षा उपकरण, बिना सुरक्षा किट के सैप्टिक टैंक की सफाई तथा मैला मानव मल-मूत्र ढोने का घृणित कार्य करवाया गया। जो कि एमएस 2013 की धारा 7 के तहत किसी भी मानव बल सफाई कर्मियों से मानव मल-मूत्र की सफाई करवाना पूर्ण प्रतिबंधित है। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा एमएस एक्ट के अनुसार किसी भी मानव बल को सीवर सैप्टिक टैंक की सफाई करवाना दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है। छ.ग. राज्य में सख्त कड़ा कानून होने के बावजूद भी नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों में मानव बल सफाई कर्मियों से मानव मल-मूत्र की सफाई और मानव मल-मूत्र ढोने की अमानवीय प्रथा आज भी जारी है तथा MS एक्ट नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
