नई दिल्ली। सफलता की राह में असफलताएं कई बार हिम्मत तोड़ देती हैं, लेकिन बिहार के पूर्णिया निवासी प्रणव ने साबित कर दिया कि लगातार मेहनत और सही रणनीति से मंजिल हासिल की जा सकती है। NEET परीक्षा में पांच बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और छठे प्रयास में सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लिया। साधारण परिवार से आने वाले प्रणव के पिता कूरियर बॉय हैं, जबकि उनकी मां स्कूल शिक्षिका हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा साथ दिया। डॉक्टर बनने का सपना उन्हें लगातार मेहनत करने की प्रेरणा देता रहा।
प्रणव ने 2018 से NEET की तैयारी शुरू की, लेकिन शुरुआती पांच प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। कई बार अच्छे अंक आने के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल नहीं हो सकी। एक समय उन्होंने NEET छोड़कर BMS में दाखिला भी ले लिया, लेकिन दोस्तों के प्रोत्साहन से उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की।
इस बार प्रणव ने अपनी रणनीति बदली। उन्होंने लगातार मॉक टेस्ट दिए, गलतियों को नोट करने के लिए ‘मिस्टेक कॉपी’ बनाई और कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया। बेहतर समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने छठे प्रयास में सफलता हासिल कर ली।प्रणव का कहना है कि, असफलताएं सीखने का मौका देती हैं। उनकी कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो अपने लक्ष्य के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
