नई दिल्ली। बढ़ती गर्मी के प्रभाव को हम सिर्फ लू, डिहाइड्रेशन या सनबर्न से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असर आपकी आंखों पर भी पड़ सकता है। गर्मी के दिनों में ड्राई आइज, रेडनेस, जलन, एलर्जी और धुंधला दिखने की समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। दरअसल, जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
हीटवेव आंखों को कैसे पहुंचाती है नुकसान?
- टियर फिल्म का सूखना- हमारी आंखों की सतह को सुरक्षित और नमी बनाए रखने के लिए एक बारीक टियर फिल्म होती है, जो धूल, प्रदूषण और इन्फेक्शन से बचाव करती है। हीटवेव के दौरान चलने वाली गर्म हवाएं, शरीर में पानी की कमी और तेज धूप इस नमी को तेजी से सुखा देती हैं। इससे आंखों में ड्राईनेस और कॉर्निया में जलन का खतरा बढ़ जाता है।
- AC और बाहरी तापमान का उतार-चढ़ाव- अक्सर लोग तेज गर्मी से बचने के लिए तेज एयर कंडीशनर में बैठते हैं और फिर अचानक तेज धूप में बाहर निकल जाते हैं। तापमान का यह अचानक बदलाव और AC की ड्राई हवा आंखों की नमी को और कम कर देती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है।
- बच्चों और युवाओं पर दोहरा असर- गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे और युवा मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताते हैं। स्क्रीन देखते समय हम पलकें कम झपकाते हैं, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन और आंखों में ड्राईनेस, रेडनेस, खुजली व जलन की समस्या काफी बढ़ जाती है।
- UV रेडिएशन के नुकसान- सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच UV किरणों का स्तर सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान सीधी धूप के संपर्क में आने से मोतियाबिंद का तेजी से बढ़ना, रेटिना को नुकसान, फोटोकेराटाइटिस यानी आंखों का सनबर्न और टेरीजियम जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
