ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 5 देशों के रणनीतिक दौरे के अगले पड़ाव पर आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच चुके हैं, जहां वे तीसरे ‘इंडिया-नॉर्डिक समिट’ में हिस्सा लेंगे। भारत और उत्तरी यूरोपीय देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाले इस महासम्मेलन में पीएम मोदी नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बार शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन शिपिंग, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और स्पेस सेक्टर पर रहेगा। खासकर भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) और नॉर्वे की स्पेस एजेंसी के बीच सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और आर्कटिक रिसर्च को लेकर बड़ी साझेदारी होने जा रही है।
इससे पहले, नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गार स्टोरे के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए हुंकार भरी कि दुनिया की बड़ी समस्याओं का हल युद्ध से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नॉर्वे ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से नवाजा है, जो मोदी को मिला 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
इसके साथ ही, पीएम मोदी ने ओस्लो में 200 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू वाली कंपनियों के ‘बिजनेस एंड रिसर्च समिट’ को भी संबोधित किया और भारत को निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद बाजार बताया। यूएई से तेल-LNG डील, नीदरलैंड से सेमीकंडक्टर और इटली से डिफेंस पार्टनरशिप के बाद, पीएम मोदी का यह नॉर्डिक दौरा भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और भविष्य की तकनीक का सबसे बड़ा हब बनाने की दिशा में एक गेमचेंजर कदम साबित हो रहा है।
