“राहुल गांधी की चेतावनी के लंबे समय बाद जागी मोदी सरकार” : अरुण वोरा

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दुर्ग। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा द्वारा देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, महंगाई, ईंधन संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की अपीलों को “जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा” बताते हुए कहा कि, राहुल गांधी ने मार्च महीने में ही देश के सामने आने वाले आर्थिक संकट और महंगाई के तूफान को लेकर आगाह कर दिया था, लेकिन मोदी सरकार को वास्तविक स्थिति समझने में 10 मई तक का समय लग गया।

वोरा ने कहा कि, आज देश का आम नागरिक डीजल, पेट्रोल, गैस और रोजमर्रा की जरूरतों की महंगाई से जूझ रहा है। किसान उर्वरक संकट से परेशान हैं, युवा बेरोजगारी से त्रस्त हैं और मध्यम वर्ग लगातार घटती बचत तथा बढ़ते कर्ज के बोझ तले दब रहा है। यह दर्शाता है कि, केंद्र सरकार हालात संभालने में पूरी तरह असफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री किसानों से उर्वरकों का उपयोग कम करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि देश के कई राज्यों में खाद की भारी कमी बनी हुई है। छत्तीसगढ़ में भी किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिल पा रहा, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यह देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब केंद्र सरकार उत्पादन बढ़ाने के बजाय खपत कम करने की सलाह दे रही है।

वोरा ने कहा कि, केंद्र सरकार अब विदेशी मुद्रा बचाने की बात कर रही है, जबकि भारतीय रुपया पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर होता जा रहा है। ईरान पर हमले और वैश्विक तनाव से पहले ही भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के करीब पहुंच चुका था और अब 95 के आसपास पहुंच गया है। तब सरकार ने कभी जनता को यह नहीं बताया कि, विदेशी मुद्रा संकट गहराता जा रहा है। न ही विपक्ष के सवालों का जवाब देना जरूरी समझा गया। अब जब हालात गंभीर हो चुके हैं, तब जनता से त्याग और कटौती की अपील की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक संकट और ईरान युद्ध का असर जरूर पड़ा है, लेकिन सच्चाई यह है कि, देश की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर चल रही थी। मोदी सरकार ने समय रहते कोई ठोस आर्थिक रणनीति नहीं बनाई और अब अपनी विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही है। अरुण वोरा ने कहा कि, प्रधानमंत्री यदि सचमुच डीजल और पेट्रोल बचाने को लेकर गंभीर हैं तो सबसे पहले भाजपा नेताओं, मंत्रियों और बड़े काफिलों पर रोक लगानी चाहिए। जनता पहले ही हर मोर्चे पर त्याग कर रही है। अब सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए, न कि, लोगों को कम खाने, कम चलने और कम खर्च करने की सलाह देना चाहिए।

वोरा ने कहा कि, मार्च और अप्रैल के महीनों में शेयर बाजार लगातार गिरता रहा, निवेशक अपना पैसा निकालकर देश से बाहर जाते रहे, भारतीय रुपया एशिया में लगातार कमजोर होता गया और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ते रहे। लेकिन उस दौरान केंद्र सरकार चुनावी प्रचार और राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रही। देश को आर्थिक संकट से बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब जब चुनाव समाप्त हो चुके हैं और हालात गंभीर हो गए हैं, तब प्रधानमंत्री जनता से कटौती, बचत और कम उपयोग की अपील कर रहे हैं। यह सरकार की आर्थिक विफलता और देर से जागने का सबसे बड़ा प्रमाण है।