नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नींव को मजबूत करने वाले सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक, 98 वर्षीय माखनलाल सरकार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने उनका आशीर्वाद लिया, जो पार्टी की ओर से अपने वरिष्ठ नेताओं और संस्थापक सदस्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। माखनलाल सरकार का राजनीतिक सफर पार्टी के लिए शुरुआती दौर के संघर्ष और विस्तार की कहानी बयां करता है। आपको बता दें की माखनलाल सरकार स्वतंत्रता के बाद के भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती और प्रमुख जमीनी नेताओं में से एक रहे हैं। राष्ट्रवाद के प्रति उनका समर्पण दशकों पुराना है। वहीं वर्ष 1952 में जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के लिए एक ऐतिहासिक आंदोलन चलाया था, तब माखनलाल उनके साथ इस अभियान में शामिल थे। इसी आंदोलन के दौरान उन्हें कश्मीर में गिरफ्तार भी किया गया था। वर्ष 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का आधिकारिक रूप से गठन हुआ, तब उन्होंने पश्चिम बंगाल में संगठन को खड़ा करने का जिम्मा उठाया। उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों के लिए संगठनात्मक समन्वयक (ऑर्गेनाइजेशनल कोऑर्डिनेटर) नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व और संगठन कौशल का प्रभाव ऐसा था कि केवल एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने पार्टी में लगभग 10,000 नए सदस्यों को जोड़ लिया था। माखनलाल सरकार का राजनीतिक सफर पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और कार्यकुशलता का प्रमाण है। वर्ष 1981 से, उन्होंने लगातार सात वर्षों तक जिलाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। यह उस दौर की एक असाधारण और दुर्लभ उपलब्धि थी, क्योंकि उस समय आमतौर पर भाजपा नेता एक ही संगठनात्मक पद पर दो साल से अधिक समय तक नहीं रह सकते थे। माखनलाल सरकार का 98 वर्ष की आयु तक का यह सफर पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में भाजपा के शुरुआती विस्तार का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। मंच पर प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें दिया गया सम्मान इस बात को पुष्ट करता है कि दशकों तक संगठन को सींचने वाले इन पुराने सिपाहियों को पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा आज भी याद रखा जाता है।
PM मोदी ने झुकाया सिर: जानें कौन हैं 98 वर्षीय माखनलाल सरकार, जिनके पैर छूकर प्रधानमंत्री ने लिया आशीर्वाद
