दिनेश हिंगू: 300 फिल्में करने के बाद भी आर्थिक तंगी, 86 की उम्र में मजबूरी बनी ‘कॉमेडी’; छलका दिग्गज एक्टर का दर्द!

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भारतीय सिनेमा में अपनी अनोखी आवाज और चेहरे के हाव-भाव से सबको गुदगुदाने वाले दिग्गज कॉमेडियन दिनेश हिंगू आज एक ऐसी हकीकत का सामना कर रहे हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे का अंधेरा बयां करती है। 86 साल की उम्र में, जहां इंसान आराम की तलाश करता है, हिंगू आज भी काम की तलाश में बाहर निकलने को मजबूर हैं। हाल ही में एक बातचीत में उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “डॉक्टर की फीस भरने के लिए भी तो ‘माल’ (पैसा) चाहिए ना! वे तो लूटते हैं, कभी 5000 मांगते हैं तो कभी 6000।”

13 अप्रैल, 1940 को बड़ौदा में जन्मे दिनेश हिंगू ने 1967 में फिल्म ‘तकदीर’ से अपना सफर शुरू किया था। ‘नमक हलाल’, ‘करण अर्जुन’, ‘हम आपके हैं कौन..!’ और ‘कुली नंबर 1’ जैसी 300 से अधिक फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाने के बावजूद, वह आज भी बुनियादी चिकित्सा खर्चों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि, पुराने दौर के सहायक कलाकारों और निर्देशकों को उतना पैसा नहीं मिलता था जितना आज के दौर में मिलता है। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों से लेकर गुजराती और राजस्थानी सिनेमा तक, उन्होंने हर जगह अपनी छाप छोड़ी, लेकिन बुढ़ापे में उनकी यह मेहनत वित्तीय सुरक्षा नहीं दे पाई।

दिनेश हिंगू का यह संघर्ष उस पूरी पीढ़ी के कलाकारों की कहानी है, जो कभी ‘लीड रोल’ में नहीं रहे, लेकिन फिल्मों की जान हुआ करते थे। उनकी हालत सवाल उठाती है कि क्या मनोरंजन जगत अपने अनुभवी कलाकारों को उनके अंतिम वर्षों में वह सम्मान और सुरक्षा दे पा रहा है, जिसके वे हकदार हैं? हिंगू का यह बयान कि ‘काम करना अब जुनून नहीं, मजबूरी है’, वाकई दिल को झकझोर देने वाला है।