मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर कांग्रेस का तीखा हमला

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बतौर निर्वाचित पीएम के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल को पीछे छोड़ने के भाजपा सरकार के जश्न और दावों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भले ही उन्होंने ‘खुद से तय किए गए और संदिग्ध तरीके से गढ़े गए’ एक मील के पत्थर को पार कर लिया हो लेकिन वे देश में “लोकतंत्र की हत्या” के लिए जिम्मेदार हैं।

एनडीए नेताओं संग पीएम माेदी के अपने 12 साल के कार्यकाल का जश्न मनाए जाने पर वार करते हुए कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने और एक ऐसी असाधारण कैबिनेट का नेतृत्व किया, जैसी मिसालें दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती हैं। अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत आकार लेने लगा।

कांग्रेस ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई
560 से अधिक रियासतों का शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में विलय किया गया। भारत के संविधान पर बहस हुई और उसे अपनाया गया। जमींदारी प्रथा समाप्त की गई। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। सिंचाई और बिजली से जुड़ी कई बहुउद्देशीय परियोजनाएं शुरू की गईं। विज्ञान और तकनीकी क्षमता के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल थी।

भारत वैश्विक मामलों में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूचियां तैयार की गईं और स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच कराए गए।

भारत में लोकतंत्र की हत्या: कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने कहा कि 1947 से 1952 के बीच भारत की उपलब्धियों का यह रिकार्ड तब बना जब नेहरू प्रधानमंत्री थे और इसमें सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी राजगोपालाचारी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे दिग्गजों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब पीएम मोदी द्वारा इसे मिटाने की कोशिश की जा रही है।

जयराम ने दावा करते हुए कहा कि पीएम मोदी की नेहरू के प्रति एक अस्वाभाविक जुनून एवं सनक है और हो सकता है कि उन्होंने आज खुद घोषित और संदिग्ध रूप से गढ़े गए किसी मील के पत्थर को पार कर लिया हो, लेकिन उनके मील के पत्थर का दूसरा पहलू यह है कि मोदी की अगुवाई में ‘भारत में लोकतंत्र की हत्या’ हो रही है।

नीट लीक से सीबीएसई तक का उठा मुद्दा
लोकतंत्र की मूल संस्थाएं-एक स्वतंत्र चुनाव आयोग और विश्वसनीय मतदाता सूची आज खतरे में हैं। हमारी शैक्षणिक संस्थाओं के विनाश के जरिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिटाया गया है। जैसा कि हाल ही में नीट-सीबीएसई घोटालों से उजावनापूर्ण औजारों के जरिए कमजोर किया गया है।

जयराम ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि जहां पंडित नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में भारी और निर्णायक बहुमत से जीत हासिल की वहीं पीएम मोदी 2024 में साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाए और उन्हें भाजपा संसदीय दल को दरकिनार कर जल्दबाजी में एनडीए की बैठक बुलानी पड़ी ताकि खुद को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार कराया जा सके। उन्होंने कहा कि 2024 निश्चित रूप से उनके लिए जनादेश नहीं था।