गंगा सप्तमी आज: स्नान-दान से मिलेगा पुण्य लाभ, जानें मां गंगा पूजन का महत्व

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आज 23 अप्रैल को वैशाख शुक्ल सप्तमी के अवसर पर गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि, इसी दिन मां गंगा भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं, इसलिए इस तिथि को गंगा जयंती के रूप में भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस वर्ष सप्तमी तिथि 22 अप्रैल रात 10:50 बजे शुरू होकर 23 अप्रैल रात 8:50 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार आज ही पर्व मनाया जा रहा है। मान्यता है कि, गंगा सप्तमी के दिन पवित्र स्नान, विधि-विधान से पूजन और दान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, अन्न, जल और वस्त्र दान को अत्यंत शुभ माना गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार मां गंगा की पूजा से रिद्धि-सिद्धि, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है। इस दिन “ॐ नमो गंगायै नमः” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। जो लोग गंगा तट नहीं जा सकते, वे घर में गंगाजल से स्नान कर पूजा कर सकते हैं। श्रद्धालु इस दिन परिवार की सुख-शांति और कल्याण की कामना भी करते हैं।

1.गंगा सप्तमी का दिन माँ गंगा के पुनः प्रकट होने का प्रतीक माना जाता है। इसे गंगा जयंती भी कहा जाता है। इस दिन गंगा पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई जन्मों तक फल देते हैं।
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2.धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी समान पुण्य मिलता है। गंगा जल के स्पर्श मात्र से मन और शरीर शुद्ध हो जाते हैं।

3. शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में स्नान, नर्मदा के दर्शन और शिप्रा के स्मरण मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ये तीनों नदियाँ जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानी जाती हैं, जो मानव जीवन को पवित्र बनाती हैं।
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4. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माँ गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ है। वामन अवतार के समय ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु के चरण धोए, जिससे निकला जल गंगा के रूप में प्रकट हुआ। बाद में यह जल भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गया और वहीं से पृथ्वी पर प्रवाहित हुआ।

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5. धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि गंगा तीन धाराओं भागीरथी, मंदाकिनी और भोगवती के रूप में तीनों लोकों में प्रवाहित होती हैं। ये धाराएं स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक को जोड़ती हैं, जिससे गंगा को त्रिलोक पावनी कहा जाता है।

6. यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद उत्तर या ईशान कोण में माँ गंगा का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें। गंगा सप्तमी की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।

7. स्नान के समय “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र का जप करें। पूजन के दौरान “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा” मंत्र का उच्चारण शुभ माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए गरीबों की सहायता करें और गौ सेवा अवश्य करें। इससे कई जन्मों के पुण्य की प्राप्ति होती है।