मुंबई। फोर्ब्स की लिस्ट में देश की सबसे सुंदर रानी का टैग पाने वाली बड़ौदा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ अपने शाही पहनावे को लेकर अक्सर ही चर्चा में बनी रहती हैं। उनकी साड़ियों में इंडियन हेरिटेज की झलक साफ नजर आती है, तो इस चिकनकारी साड़ी वाले लुक में भी दिखीं। जिसे फेमस डिजाइनर ने उनके लिए डिजाइन किया, तो इस पर हुआ सालों पुरानी विरासत वाला काम लुक की खूबसूरती को बढ़ा गया। दरअसल यूं तो बड़ौदा की महारानी के साड़ी लुक्स हमेशा ही लोगों का दिल जीत लेते हैं, लेकिन इस बार मुगल महारानी नूरजहां वाले खूबसूरत कढ़ाई के कनेक्शन ने ज्यादा ध्यान खींचा। जिसे उन्हें क्लासी तरीके से स्टाइल किया और अपनी शाही शान दिखाकर खूबसूरती से सबको इंप्रेस कर दिया। ऐसे में चलिए साड़ी की कढ़ाई के सालों पुराने कनेक्शन से लेकर महारानी के लुक की डिटेल्स के बारे में जानते हैं। आपको बता दें की महारानी की साड़ी को फेमस डिजाइनर तरुण तहिलियानी ने डिजाइन किया। इस हैंड एम्ब्रॉयडेड चिकनकारी साड़ी में आइवरी के साथ पिंक, येलो और ब्लू जैसे सॉफ्ट पेस्टल कलर का यूज हुआ है, तो मुकैश कढ़ाई से लेकर जरी और क्रिस्टल के वर्क से इसे सजाया। जिसका क्लासी डिजाइन और महारानी का ग्रेस के साथ इसे कैरी करने वाला अंदाज लुक को रॉयल फील दे गया।
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वहीं हाथ से बुना गई साड़ी के डिजाइन की बात करें, तो इस पर ब्लू और पिंक कलर के बॉक्स बने हैं। जिन्हें चिकनकारी कढ़ाई से बेल पैटर्न बनाकर स्क्वायर शेप दी और फ्लोरल मोटिफ्स से सजाया। वहीं, बॉर्डर को चौड़ा रखते हुए पल्लू को हैवी वर्क से सजाया। जिस पर पर्ल्स से भी डिटेलिंग की गई, तो साथ में महारानी ने मैचिंग शॉल भी कैरी किया। जिसके कलर और पैटर्न को सेम साड़ी जैसा रखा, तो बॉर्डर पर लगे आइवरी- ब्लू टैस्लस इसकी ब्यूटी को और बढ़ा गए। जिसे ओपन करके कंधे पर कैरी किए महारानी राधिकाराजे का देसी लुक देखते ही बना। चिकनकारी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) की पारंपरिक हाथ से की जानी वाली कढ़ाई है। चिकन शब्द की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत है, लेकिन इसे आमतौर पर फारसी शब्द चिकीन (कढ़ाई) से आया माना जाता है। यह मूल रूप से मलमल जैसे महीन कपड़ों पर सफेद धागे से की जानी वाली टोन-ऑन-टोन (सफेद पर सफेद) कला है। इसमें 40 से अधिक प्रकार के टांकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें छाया कढ़ाई सबसे प्रमुख है। पारंपरिक रूप से इसे सफेद मलमल पर ही किया जाता था, लेकिन अब यह जॉर्जेट, शिफॉन, रेयॉन और कॉटन जैसे कपड़ों पर पेस्टल रंगों में भी की जाती है। चिकनकारी का इतिहास लगभग 400-500 साल पुराना माना जाता है। जिसे भारत में लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुगल सम्राट जहांगीर की बेगम नूरजहां को जाता है। कहा जाता है कि मुगल दौर में उन्होंने इस बारीक और खूबसूरत कढ़ाई को खास तौर पर लखनऊ में बढ़ावा दिया। 16वीं- 17वीं सदी में फली-फुली इस कला की जड़ें पर्शियन (ईरानी) कढ़ाई से भी जोड़ी जाती हैं। कहते हैं कि मुगल महारानी नूरजहां को यह बारीक कढ़ाई इतनी पसंद आई कि वह चिकनकारी वाले कपड़े खुद पहनने लगी। इसके बाद ये शाही पसंद बना और फिर धीरे-धीरे आम लोगों तक भी पहुंच गया।
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यह भी एक पारंपरिक कढ़ाई है, जो खासतौर पर लखनऊ से जुड़ी मानी जाती है। इसमें कपड़े पर बहुत पतली मेटल की तार (गोल्ड या सिल्वर) को हाथ से बुना या पिरोया जाता है। जिससे कपड़े पर छोटे-छोटे चमकदार पैटर्न बनते हैं। इसके लिए तार को कपड़े में सुई की मदद से डाला जाता है और फिर उसे मोड़कर या ट्विस्ट करके छोटे-छोटे डॉट्स, फूल या जियोमेट्रिक डिजाइन बनाए जाते हैं। सारा काम हाथ से किया जाता है, इसलिए यह काफी मेहनत वाला काम होता है। महारानी ने लुक को पूरा हीरों के गहनों के साथ किया, जो लुक में शाही चमक ले आए। गले में नेकलेस डाल वह मैचिंग ड्राप इयररिंग्स पहने दिखीं, तो ब्रेसलेट और रिंग भी लुक में शाइन ऐड कर गए। जिसे सॉफ्ट कर्ल्स ओपन हेयर और रेड लिप्स के साथ उन्होंने फाइनल टच दिया। जहां रेड लिप्स और बिंदी लुक में पॉप कलर ऐड करने के साथ ही पेस्टल साड़ी में उनकी खूबसूरती को और एन्हांस कर गए। तभी तो महारानी राधिकाराजे का अंदाज हमेशा की तरह क्लास, एलिगेंस और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बो दिखा गया।
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