नोएडा। महिला आरक्षण बिल पर जारी बहस के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का इतिहास रहा है कि हम लोगों ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ने का काम किया है। डॉ राम मनोहर लोहिया ने हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस की बात की है। महिलाओं का आरक्षण 33% हो उसके पक्ष में हम लोग बोल रहे हैं। उन्होंने कहा हम महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन भाजपाई चालबाजी के खिलाफ हैं। महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है हम लेकिन जो जल्दबाजी है जिस तरह से लाया जा रहा है उसके खिलाफ हैं। जातीय जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा, यह सबसे बचना चाहते हैं। देश में आरक्षण के साथ-साथ संरक्षण की ज्यादा जरूरत है।” वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि नारी को नारा बनाने की कोशिश हो रही है। जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा उनके मान सम्मान के लिए कैसे रखेंगे। जिस पैरेंटल संगठन से आप निकले हैं उसमें कितनी नारी हैं यह बता दे आप।”
आपको बता दें की उन्होंने कहा कि ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण मिले। मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिले। भाजपा राज में सबसे ज्यादा महिलाएं दुखी हैं। भाजपा की 21 जगह सरकारें हैं, भारतीय जनता पार्टी बताएं इनमें से भाजपा की कितनी महिला मुख्यमंत्री बनी हुई हैं। दिल्ली में भी महिला होने के नाते वह हाफ चीफ मिनिस्टर हैं। वहीं संस्कार का आरंभ महिला से होता है, यदि महिला जागृत है तो पूरा समाज जागृत हो जाता है। जब तक महिलाएं राजनीति में नहीं आएगी तो सामाजिक क्रांति अधूरी रहेंगी। इसीलिए उत्तर प्रदेश में पंचायत में सबसे पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का काम समाजवादी पार्टी ने किया था।” अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना के बाद परिसीमन शुरू हो। परिसीमन सिर्फ भाजपा का षड्यंत्र है। परिसीमन से चुनावी नक्शा बदलने की साजिश हो रही है। महिला आरक्षण के नाम पर जल्दबाजी किस बात की है? सच तो यह है भाजपा जातीय जनगणना को टालना चाहते हैं क्योंकि उसके बाद आरक्षण देना होगा जो भाजपा के संघी साथी देना नहीं चाहते हैं।”
