नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से एक कड़ा और रणनीतिक संदेश दिया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट चेतावनी दी कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों) का इस्तेमाल किसी भी सूरत में कूटनीतिक या व्यापारिक हथियार के तौर पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने पुरजोर वकालत की कि तकनीक के प्रसार में एकाधिकार के बजाय समावेशिता होनी चाहिए, ताकि दुनिया का कोई भी हिस्सा विकास की दौड़ में पीछे न छूटे।
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प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक और आवश्यक खनिजों की सप्लाई चेन पर किसी एक देश का नियंत्रण पूरे विश्व के साझा विकास और आर्थिक प्रगति की रफ्तार को रोक सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में निष्पक्ष और पारदर्शी सप्लाई चेन ही वैश्विक स्थिरता की गारंटी है। किसी संसाधन को दबाव बनाने का जरिया बनाना अंतरराष्ट्रीय विश्वास और आर्थिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा है।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान सीधे तौर पर चीन की कार्यप्रणाली पर लक्षित था। वर्तमान में चीन के पास दुनिया की 90 फीसदी से अधिक रेयर अर्थ रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सेमीकंडक्टर चिप्स, एआई डेटा सेंटर्स और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण में इन खनिजों की अहम भूमिका है। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के दौरान चीन अक्सर इन खनिजों के निर्यात पर पाबंदियां लगाकर वैश्विक बाजार पर दबाव बनाता रहा है।
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पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अहम संसाधनों का रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने का सबसे बुरा असर ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील और गरीब देशों पर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि दुर्लभ खनिजों तक सभी देशों की समान और निष्पक्ष पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि विकासशील देश भी तकनीक के इस दौर में आत्मनिर्भर बन सकें और उनका औद्योगीकरण बाधित न हो।
