क्या है GPS और कैसे बताता है सटीक लोकेशन? जानिए इसके काम करने का पूरा तरीका

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नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में कहीं भी रास्ता ढूंढना बेहद आसान हो गया है। स्मार्टफोन या कार का नेविगेशन सिस्टम ऑन करते ही सटीक लोकेशन मिल जाती है। यह संभव होता है ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) की मदद से, जो अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के नेटवर्क पर आधारित एक आधुनिक तकनीक है। GPS दरअसल 30 से अधिक नेविगेशन सैटेलाइट्स का समूह है, जो पृथ्वी के चारों ओर ऊंची कक्षा में लगातार घूमते रहते हैं। ये सैटेलाइट लगातार सिग्नल भेजते हैं, जिन्हें आपके फोन, घड़ी या वाहन में लगे रिसीवर द्वारा प्राप्त किया जाता है। इन सिग्नल्स के आधार पर डिवाइस यह गणना करता है कि आप पृथ्वी पर किस स्थान पर मौजूद हैं। यह प्रणाली मुख्य रूप से तीन हिस्सों पर आधारित होती है—सैटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन और रिसीवर। सैटेलाइट पृथ्वी से करीब 20,000 किलोमीटर ऊपर घूमते हैं और हर 12 घंटे में एक चक्कर पूरा करते हैं। ग्राउंड स्टेशन इनकी निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर इनके मार्ग को सही करते हैं। वहीं रिसीवर, जो हमारे डिवाइस में होता है, सैटेलाइट से मिले सिग्नल के आधार पर दूरी की गणना करता है। जब रिसीवर को कम से कम चार सैटेलाइट से सिग्नल मिलते हैं, तो वह ‘ट्राइलेटरेशन’ तकनीक की मदद से सटीक लोकेशन निर्धारित करता है। सामान्य GPS कुछ मीटर तक सटीक होता है, जबकि उन्नत सिस्टम कुछ सेंटीमीटर तक की सटीकता प्रदान कर सकते हैं। पहले जहां लोग दिशा जानने के लिए तारों का सहारा लेते थे, वहीं अब GPS तकनीक ने इस काम को तेज और बेहद सटीक बना दिया है। इसका उपयोग केवल नेविगेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि विमानन, समुद्री परिवहन, सेना, कृषि, डिलीवरी सेवाओं और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी जैसे कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। GPS का विकास अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा किया गया था, लेकिन आज यह ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) का हिस्सा बन चुका है, जिसमें रूस का GLONASS जैसे अन्य सिस्टम भी शामिल हैं। यह तकनीक आधुनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।