नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह बातचीत कतर और पाकिस्तान की संयुक्त मध्यस्थता में हो रही है। दोनों देशों ने उम्मीद जताई है कि यह पहल क्षेत्रीय तनाव कम करने और एक व्यापक तथा स्थायी समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी।
समझौता ज्ञापन के आधार पर आगे बढ़ रही बातचीत
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता का केंद्र 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच अंतिम रूप दिए गए 14-सूत्रीय ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर आधारित है। इस समझौते के तहत दोनों देशों को प्रमुख विवादों के समाधान और पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
तकनीकी और विशेषज्ञ समूहों का गठन
बयान में कहा गया है कि अंतिम समझौते की शर्तों पर विस्तृत चर्चा के लिए विशेष तकनीकी एवं विशेषज्ञ समूह बनाए गए हैं। ये समूह MoU के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे और संभावित सहमति बिंदुओं को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, समझौते के कार्यान्वयन, प्रगति की निगरानी और भविष्य की बातचीत को दिशा देने के लिए अलग फॉलो-अप तंत्र भी स्थापित किए गए हैं।
टिकाऊ समाधान पर जोर
कतर के राजनयिक सूत्रों ने कहा कि मौजूदा प्रगति सभी पक्षों की सकारात्मक सोच और संवाद के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कतर और पाकिस्तान ने स्पष्ट किया कि वे अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाने का प्रयास जारी रखेंगे, जिससे वार्ता अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंच सके। कतर ने दोहराया कि संघर्षों और विवादों के समाधान के लिए कूटनीति और संवाद सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से बढ़ी अहमियत
वार्ता की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं। उन्होंने अमेरिकी वार्ताकारों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात की। वहीं, ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अरागची तथा केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर विशेष जोर दे रहे हैं।
