सूरजपुर। जिले के प्रतापपुर विकासखंड में पहली ही मानसूनी बारिश के दौरान निर्माणाधीन रपटा बह गया। नदी के तेज बहाव में रपटे के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सूरजपुर कलेक्टर रैना जमील ने जांच के आदेश जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेतु संभाग की ओर से धोन्धा-गोविंदपुर-रमकोला मार्ग पर आवागमन सुचारु करने के लिए रपटे का निर्माण कराया जा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि रपटा लगभग तैयार हो चुका था और लोगों ने उस पर आवागमन भी शुरू कर दिया था। वहीं विभाग का कहना है कि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ था और तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से यह नुकसान हुआ।
रपटा बहने के बाद PWD के सेतु संभाग और संबंधित ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामले की जांच के लिए कलेक्टर ने विशेष जांच दल का गठन किया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, जनपद पंचायत भैयाथान के ग्राम पंचायत डबरीपारा में भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं। यहां गोबरी नदी पर करीब 15 लाख रुपये की लागत से बना रपटा पहली तेज बारिश में ही बह गया। रपटे के टूटने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है।
मार्ग बंद होने से स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और रोजाना काम के लिए जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कर मार्ग बहाल करने की अपील की गई है।
