ईरान युद्ध पर ट्रंप को करारा झटका: सैन्य शक्तियाँ सीमित करने का प्रस्ताव अमेरिकी संसद में पास, अपनी ही पार्टी ने बदला पासा

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वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी घरेलू राजनीति में एक बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हो गया है। इस प्रस्ताव के जरिए मांग की गई है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को तुरंत रोके और संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के बिना इस युद्ध को आगे न बढ़ाए। इस प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया। ट्रंप के लिए सबसे बड़ी फजीहत तब हुई जब उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के चार प्रमुख सांसदों—थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन—ने पार्टी लाइन से अलग जाकर विपक्ष (डेमोक्रेट्स) का साथ दिया। रिपब्लिकन सांसदों का मानना है कि इस युद्ध के कारण देश में महंगाई, पेट्रोल-डीजल और खाद की कीमतें बेकाबू हो रही हैं और जनता अब इस लंबे खींचते युद्ध से थक चुकी है।

दरअसल, अमेरिकी ‘वार पावर्स एक्ट’ के तहत राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के 60 दिनों से ज्यादा विदेशी सैन्य अभियान नहीं चला सकते। चूंकि यह युद्ध 28 फरवरी से जारी है और अपनी समयसीमा पार कर चुका है, इसलिए बिना मंजूरी चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर अब संसद और जांच एजेंसियों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि, इस प्रस्ताव को पूरी तरह कानून बनने के लिए अभी ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से पास होना होगा। इसके बाद यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस पर वीटो (Veto) लगाते हैं, तो उसे पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिर भी, अपनी ही पार्टी का विरोध झेल रहे ट्रंप के लिए यह एक बड़ा सियासी झटका है।