अनेक रिकार्ड बनाते-तोड़ते हुए भारतीय क्रिकेट टीम की बेटियों ने एक बार फिर एशिया कप देश के नाम कर दिया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एशिया कप में 72 रन की जीत महज एक ट्रॉफी जीतने की कहानी नहीं है। यह उस निरंतरता और बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रमाण है, जिसने भारतीय महिला क्रिकेट को एशिया में सबसे मजबूत टीमों में शामिल किया है। दुबई में श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में भारत ने जिस अंदाज में मुकाबला अपने नाम किया, उसने एक बार फिर बता दिया कि बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने और निर्णायक मौके पर बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। इस जीत की सबसे खास तस्वीर भारत की सलामी जोड़ी स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने पेश की। दोनों ने पहले विकेट के लिए 129 रन जोड$कर श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण को शुरुआती दौर में ही दबाव में ला दिया। शेफाली की महज 24 गेंदों में फिफ्टी और 39 गेंदों पर 68 रन की पारी ने मैच का रुख काफी हद तक तय कर दिया। दूसरी तरफ स्मृति मंधाना की 59 रन की पारी ने पारी को स्थिरता और गति दोनों दी। दरअसल, किसी भी फाइनल में शुरुआत का महत्व बहुत ज्यादा होता है। भारत को जिस तरह की शुरुआत मिली, उसने बाद की बल्लेबाजी पर दबाव कम कर दिया। यही वजह रही कि बीच के ओवरों में कुछ विकेट जल्दी गिरने के बावजूद भारतीय टीम 183 रन तक पहुंचने में सफल रही। पारी की आखिरी गेंद पर कमलिनी का छक्का इस बात का प्रतीक रहा कि टीम ने आखिरी गेंद तक रन बनाने का इरादा बनाए रखा। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को 111 रन पर समेटकर जीत को औपचारिकता में बदल दिया। 72 रन की जीत बताती है कि फाइनल में भारत ने खेल के दोनों विभागों में श्रीलंका से स्पष्ट बढ़त बनाए रखी। इस जीत का एक भावनात्मक पहलू भी है। 2024 में श्रीलंका ने भारत को हराकर एशिया कप जीता था। इस बार वही श्रीलंका फाइनल में भारत के सामने था और भारतीय टीम ने उसे बड़े अंतर से हराकर पिछली हार का हिसाब भी बराबर कर दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने महिला एशिया कप का खिताब 8वीं बार अपने नाम किया है। यह आंकड़ा अपने आप में भारतीय महिला क्रिकेट के दबदबे की कहानी कहता है। हालांकि, इस सफलता को सिर्फ रिकॉर्ड के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय महिला क्रिकेट के लिए असली चुनौती अब इस दबदबे को वैश्विक मंच पर बड़ी ट्रॉफियों में बदलने की है। एशिया में भारत का वर्चस्व लगातार दिखाई दे रहा है। अब उम्मीद यही होगी कि स्मृति, शेफाली, हरमनप्रीत और उनकी साथी खिलाड़ी इसी आत्मविश्वास को विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में भी लेकर जाएं। विश्व कप में भी हमारा प्रदर्शन बहुत शानदार रहता आया है, लेकिन हमारी टीम दो बार रनर अप रही यानि हम विश्व कप भी जीत सकते हैं। बेटियों में ऊर्जा है और हौसला भी, कुछ टैक्निक और कुछ संयोग का तड$का और लग जाए तो अगला विश्व कप भी हमारे पास होगा। एशिया कप की यह जीत इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ एक और ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के बढ़ते कद की पुष्टि है। हरमन सेना को इस शानदार जीत की बहुत-बहुत बधाई। साथ ही अगले विश्व कप के लिए उम्मीदों भरी शुभकामनाएं। हमें विश्वास है कि बेटियों का हौसला देश को इसी तरह विजेता बनाता रहेगा।
बेटियों की बादशाहत-संजय सक्सेना
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