जेन जी का बढ़ता प्रभाव-डॉ.माणिक विश्वकर्मा

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वैश्विक जनरेशन के वर्गीकरण की शुरुआत अमेरिका के समाज और जनसांख्यिकी विशेषज्ञों द्वारा की गई जिसे उन्होंने जन्म लेने की अवधि के आधार पर कई श्रेणियों में बाँटा गया है यथा ग्रेटेस्ट जेनरेशन 1901 से 1927, साइलेंट जेनरेशन 1928 से 1945, बेबी बूमर्स 1946-1964, जनरेशन एक्स 1965-1980, जनरेशन वाई 1981-1996 इसे मिलेनियल्स भी कहा जाता है, जेन जेड अर्थात जेन जी 1997-2012 एवं जेन अल्फा 2013 के बाद जन्में लोग। अपने काम, जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को महत्व देने वाली यह पीढ़ी बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का उपयोग कर रही है। 14 से 29 वर्ष की यह पीढ़ी राष्ट्रबोध, संस्कृति एवं सहीं मार्ग में चलकर देश को नयी दिशा प्रदान कर सकती है। आज जरूरत है युवा पीढ़ी को सही, मार्गदर्शन, नैतिक शिक्षा और अपनी संस्कृति का महत्व प्यार से समझाने की। ताकि वे आधुनिकता को अपनाने के साथ ही अपनी मूल सम्यता, संस्कृति और संस्कार के संरक्षण एवं संवर्धन का पूरा ध्यान रख सकें। बच्चों में अच्छे संस्कार के निर्माण भी परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावकों को इस बात का ध्यान शुरू से रखना चाहिए। कुछ समय पूर्व दिल्ली के जंतर मंतर में जो आंदोलन हुआ उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस पीढ़ी के विचारों पर सोचने के लिए विवश किया। ये और बात है कि इस आंदोलन को कुछ असामाजिक तत्वों ने राजनीतिक रंग देकर गलत दिशा में मोड़ने की भरपूर कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। जिस उत्साह, लगन एवं संगठन क्षमता का परिचय युवाओं ने दिया वह निश्चित रूप से काबिले तारीफ है। जिस तरह किसी पौधे का फूलना एवं फलना उर्वरक भूमि एवं अच्छे वातावरण पर भी निर्भर करता है ठीक उसी प्रकार आज देश के युवाओं को विकसित होने अच्छा वातावरण देने की आवश्यकता है। मुझे पूरा विश्वास है कि जेन जी पीढ़ी के उर्जावान युवा अपनी पूरी ताकत एवं क्षमता राष्ट्र के विकास हेतु लगा लेंगे। यह शाश्वत सच है कि किसी भी राष्ट्र का विकास केवल आर्थिक विकास पर निर्भर नहीं होता वहाँ की सभ्यता, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों को पोषित करने पर भी निर्भर होता है ।देश की आजादी की लड़ाई के वक्त भी उर्जावान युवा पीढ़ी के अनेक लोगों ने कड़ी मेहनत, अनुशासन, सहनशीलता एवं पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना कर्तव्य निभाया था, कुर्बानियां दी थीं। आज युवा पीढी को पूरी दुनिया छोटी सी स्क्रीन में दिखाई पड़ जाती है। आवागमन एवं कम्यूनिकेशन के लिए अनेक संशाधन मौजूद हैं। नयी पीढ़ी के लोगों को कोसना कोघ नयी को कोसा है, और बुजुर्ग पीढ़ी ने वाले बच्चों बात नहीं है हर पुरानी पीकी ने अपनी जवानी में अपने बुजुर्गों बुजुर्गों को यही लगता रहा है कि अब दुनिया बर्बाद हो रही है। जबकि ऐसा न कभी हुआ है न होगा। केवल सोचने और समझने का अंतर है। यदि पुरानी पीढ़ी के लोग ‘ठहराव’ और ‘सुरक्षा’ में यकीन रखते हैं तो नई पीढ़ी ‘रफ्तार’ और ‘प्रयोग’ में। पुरानी पीढ़ी यदि नक्शे कदम पर चलना पसंद करती हैं तो नई पीढ़ी आज नई जमीन तलाशना चाहती है। इसका एक ही हल है आलोचना की जगह एक दूसरे को सुनना शुरू करें। जेन जी के पास जानकारियों का महासागर है। विभिन्न मुद्दों पर विचारों की जो स्पष्टता इस पीढ़ी के पास है वह काबिले तारीफ है यह पीढ़ी केवल सफलता के पीछे नहीं भाग रही है अपितु जीवन में सार्थकता भी तलाशने में जुटी है। युवावस्था में तेवर का बगावती होना आम बात है बशर्ते वह उग्र रूप धारण न करे। बगावती तेवर यदि सकारात्मक हो तो लाभ होता है अन्यया नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। सीनियर्स के पास अनुभव का खजाना है तो युवाओं के पास भरपूर उर्जा। यदि सीनियर्स नींव की ईंट है, तो युवा उस नींव पर खड़े होने वाले शिखर। यदि दोनों मिल जाएँ तो किसी भी कार्य को अभूतपूर्व अंजाम दे सकते हैं। युवाओं की क्षमता पर मेरी कुछ पंक्तियाँ-तुम ही निर्माता हो देश के भविष्य हो, तुम ही अर्जुन तुम ही एकलव्य शिष्य हो कुछ भी असंभव नहीं तुम्हारे वास्ते, जा सकते हो कहीं भी पवन सदृश्य हो। मेरे विचार से जेन जी जागरूक, खुली सोच वाली, तकनीक प्रेमी और व्यावहारिक पीढ़ी है जो बनावटीपन की जगह सच्चाई को पसंद करती है एवं अपनी शर्तों पर जीना चाहती है। राष्ट्रहित से संबंधित उनके + विचारों एवं उद्यमिता से संबंधित दृष्टिकोण का स्वागत होना।