नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक बड़े अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नकली और अवैध कैंसर रोधी दवाओं के काले कारोबार में शामिल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में अस्पताल के कर्मचारी, फार्मासिस्ट और दवा व्यापारी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि छह राज्यों में फैला ये नेटवर्क नकली सप्लायर्स के ज़रिए महंगी कैंसर दवाएं हासिल करता था, अस्पतालों से मरीज़ों के लिए आई दवाओं को किसी और को देता था और सरकारी अस्पतालों को सप्लाई की गई दवाओं को बाहर बेच देता था। इसके लिए वे कई राज्यों में फैले बिचौलियों की एक चेन का इस्तेमाल करते थे।
जांच के दौरान पुलिस ने 588 कैंसर रोधी दवा की शीशियां, 3,000 से ज़्यादा अन्य दवाएं, लगभग 50 लाख रुपये नकद और लेन-देन के रिकॉर्ड बरामद किए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जून में महंगी कैंसर रोधी दवाओं के कारोबार से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद पिछले महीने क्राइम ब्रांच के इंटर-स्टेट सेल ने मामला दर्ज किया। दिल्ली पुलिस ने ड्रग कंट्रोल अधिकारियों और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली और नवी मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की।
बरामद दवाओं में डार्ज़ालेक्स, कीट्रूडा , इम्फिन्ज़ी , एरबिटक्स , गैज़िवा , बावेन्सियो और एडसेट्रिस जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर अलग-अलग तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है। जांचकर्ताओं ने बताया कि दवाओं को ब्रोकरों और दवा व्यापारियों के नेटवर्क के ज़रिए आगे भेजने से पहले घरों और अन्य जगहों पर रखा जाता था।
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पुलिस ने कहा कि दवाओं के स्रोत को छिपाने के लिए, आरोपी असली दवा के डिब्बों का दोबारा इस्तेमाल करते थे और एसीटोन जैसे केमिकल का इस्तेमाल करके बैच नंबर, कीमत के लेबल और अन्य निशान हटा देते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से थर्मोकोल बॉक्स, बबल रैप, पैकिंग सामान, रजिस्टर, डायरी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी बरामद किए। इन चीजों का इस्तेमाल इस अवैध काम में किया जाना था।
पुलिस की जांच में अस्पताल के कर्मचारियों की भी कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से कम से कम तीन अस्पताल में काम करते थे और उन पर कैंसर मरीज़ों के लिए आई दवाओं को गैर-कानूनी बाज़ार में भेजने में मदद करने का आरोप है। इनमें से एक, फरीदाबाद के रहने वाले जसवंत शर्मा (42), ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में नर्सिंग इंचार्ज हैं और उन पर अस्पताल से कैंसर रोधी दवा की शीशियां निकालकर बेचने का आरोप है।
एक और आरोपी, दीपक उर्फ रवि (33), फरीदाबाद निवासी बतौर ऑन्कोलॉजिस्ट के निजी सहायक के तौर पर काम करता था। आरोप है कि उसने ये दवाएं इकट्ठा कीं और नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों तक पहुंचाईं। पुलिस ने बताया कि उसके घर से 108 एंटी-कैंसर दवा की शीशियां और 6.5 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।
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हैदराबाद में, पुलिस ने अस्पताल की सप्लाई चेन से जुड़े दो और लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें अस्पताल में काम करने वाले बी.फार्मा ग्रेजुएट मालूगारी श्रीनाथ रेड्डी (35) और रामदास सतीश कुमार (42) शामिल हैं, जिन्होंने पहले एक जाने-माने अस्पताल में काम किया था। दोनों पर इस रैकेट के लिए एंटी-कैंसर दवाओं को कहीं और भेजने करने का आरोप है।
पुलिस ने यह भी कहा कि यह नेटवर्क इस कारोबार को कानूनी दिखाने के लिए असली बिजनेस का इस्तेमाल करता था। गाजियाबाद में दवा की फर्म चलाने वाले विश्वास त्यागी (35) पर आरोप है कि उसने दवा की सप्लाई किए बिना ही नकली चालान बनाए और अपनी फर्म के बैंक खाते के जरिए पेमेंट का लेन-देन किया।
दवा व्यापारियों के पास से भी बड़ी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं। पुलिस ने नोएडा के व्यापारी आनंद कुमार (42) से 337 एंटी-कैंसर दवा की शीशियां, गुरुग्राम के फार्मास्युटिकल बिजनेसमैन मयंक गर्ग (35) से 55 संदिग्ध कैंसर रोधी दवा शीशियां और हैदराबाद में श्रीनिवासुलु कालवा (52) द्वारा चलाए जा रहे मेडिकल स्टोर से 23 संदिग्ध नकली दवाएं जब्त कीं।
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कई आरोपियों से नकदी भी बरामद की गई है, जिसमें दिल्ली के शुभम कुमार चौधरी (25) से 23 लाख रुपये, गुरुग्राम के मुकेश (30) से 16.5 लाख रुपये और दिल्ली के ही एक अन्य आरोपी अभिषेक वैश्य (26) से 4 लाख रुपये शामिल हैं। पुलिस ने छापेमारी के दौरान अकाउंट बुक, डायरी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए।
पुलिस ने कहा कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने, दवा सप्लाई करने और खरीदने वालों की पहचान करने, पैसे के लेन-देन पता लगाने और इसमें शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार करने के लिए जांच जारी है। इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां और बरामदगी होने की उम्मीद है।

