मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है। नियामक ने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद मिले अनुभव और बाजार सहभागियों के सुझावों को देखते हुए अगले सप्ताह इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया जाएगा।
3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश सेगमेंट में लागू CAS व्यवस्था के तहत क्लोजिंग प्राइस को ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी सेटलमेंट का आधार बनाया गया था। हालांकि, इसके लागू होने के बाद स्टॉक एक्सचेंजों, ब्रोकरों, म्यूचुअल फंडों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और अन्य बाजार सहभागियों ने इस व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई।
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सेबी ने बताया कि, पहले महीने के दौरान उसने कैस के प्रभाव और परिचालन संबंधी चुनौतियों की लगातार निगरानी की। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मिले फीडबैक में सबसे बड़ा मुद्दा सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा पद्धति पर पुनर्विचार का रहा। अब नियामक संभावित बदलावों पर सार्वजनिक सुझाव लेने के बाद अंतिम फैसला करेगा।
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