काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद 5,300 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है, जिनमें करीब 600 बच्चे शामिल हैं। बच्चों की तलाश में राहत और बचाव टीमों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिन स्कूलों की मदद से बच्चों की जानकारी जुटाई जाती थी, उनमें से कई बाढ़ में पूरी तरह बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, संचार नेटवर्क ठप होने की वजह से परिवारों, स्कूलों और अधिकारियों के बीच संपर्क भी प्रभावित हुआ है, जिससे लापता बच्चों का सत्यापन और तलाश अभियान और कठिन हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रसुवा में चार और नुवाकोट में आठ समेत कम से कम 12 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। बाढ़ के बाद नौ दिनों से बचाव अभियान चल रहा है, लेकिन दोनों जिलों से करीब 600 बच्चों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। नुवाकोट शिक्षा विकास एवं समन्वय इकाई के प्रमुख सूर्य बहादुर खत्री ने बताया कि अधिकारी प्रधानाध्यापकों से संपर्क कर लापता छात्रों के सत्यापित आंकड़े जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण परेशानी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि नुवाकोट में करीब 300 छात्रों के लापता होने का अनुमान है।
यूनिसेफ के अनुमान के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने आपदा के बाद बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत बताई है। इस बीच, नेपाल में बाढ़ से अब तक 1,282 लोगों की मौत और 12,038 लोगों के सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से संजय साह और कबीर महर्जन नाम के दो मजदूरों को जिंदा बचाया गया है। माना जा रहा है कि सुरंग में अभी और लोग फंसे हो सकते हैं। भारत ने भी नेपाल के लिए सातवीं बार राहत सहायता भेजी है।
