रायपुर। कभी हर सुबह पानी की चिंता से शुरू होने वाला बाहरचूरा का नदी पार पारा आज राहत और संतोष की मुस्कान से खिल उठा है। नदी के उस पार बसे महज 8 परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल कभी एक सपना था, लेकिन प्रशासन की तत्परता और संवेदनशील पहल ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। बलरामपुर जिला के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बाहरचूरा का यह छोटा सा पारा वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहा था। करीब 38 लोगों की आबादी वाले इस इलाके में पानी के लिए रोज संघर्ष करना ग्रामीणों की नियति बन चुकी थी। महिलाओं को नदी पार कर दूर-दूर तक पानी लाना पड़ता था, बच्चे भी पानी ढोने में हाथ बंटाते थे और गर्मी के दिनों में यह समस्या और भयावह हो जाती थी।
ग्रामीणों की पीड़ा जब प्रशासन तक पहुँची, तो इसे केवल एक शिकायत नहीं बल्कि लोगों की मूलभूत जरूरत और सम्मान से जुड़ा विषय माना गया। जिला प्रशासन ने तुरंत पहल करते हुए नदी पार पारा में बोर खनन कार्य शुरू कराया और नया हैंडपंप स्थापित कराया। हैंडपंप से पहली बार पानी निकलते ही पूरे पारा में खुशी की लहर दौड़ गई। जिन घरों में हर दिन पानी को लेकर चिंता और परेशानी रहती थी, वहां अब राहत और सुकून का माहौल है। महिलाओं की मेहनत कम हुई है, बच्चों को राहत मिली है और परिवारों को घर के पास ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि, यह सिर्फ एक हैंडपंप नहीं, बल्कि उनके जीवन में आई बड़ी राहत है। उन्होंने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता के लिए आभार व्यक्त किया।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि, शासन की योजनाएं और प्रशासन की प्रतिबद्धता जब संवेदनशीलता के साथ जमीन पर उतरती हैं, तब दूरस्थ और छोटे से छोटे गांव तक विकास और राहत की धारा पहुंचती है। जिला प्रशासन लगातार ऐसे क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास कर रहा है, ताकि कोई भी ग्रामीण बुनियादी जरूरतों से वंचित न रहे।
